बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद ने अपनी अंतरिम जमानत की शर्तों में बदलाव के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। राशिद ने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें उनके बीमार पिता के पास रहने के लिए दिल्ली आने की अनुमति दी जाए, जिन्हें हाल ही में श्रीनगर से एयरलिफ्ट कर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है।
बता दें कि इंजीनियर राशिद को उनके बीमार पिता की देखभाल के लिए हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि, अदालत के पिछले आदेश के तहत जमानत की अवधि के दौरान उन्हें केवल श्रीनगर में रहने की अनुमति थी। इस बीच, राशिद के पिता की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर से दिल्ली लाना पड़ा।
सोमवार को सुनवाई के दौरान राशिद के वकील ने दलील दी कि भौगोलिक प्रतिबंधों के कारण सांसद अपने पिता से दूर हैं। उन्होंने कहा, “मैं श्रीनगर में फंसा हुआ हूं और मुझे आने की अनुमति नहीं है। मेरे पिता यहाँ (दिल्ली में) हैं और मैं वहाँ हूं।”
सुनवाई के दौरान जब राशिद के वकील ने सुझाव दिया कि वह दिल्ली में अपने आधिकारिक सांसद फ्लैट में रुक सकते हैं, तो जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने इस पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताईं।
अदालत ने टिप्पणी की कि वह फ्लैट ऐसे परिसर में है जहां अन्य सांसद भी रहते हैं। बेंच ने कहा, “यह पर्याप्त नहीं है। आप उस सांसद आवास में नहीं रह सकते जहां अन्य सांसद रह रहे हैं। मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकती। यह सुरक्षा का मुद्दा होगा।” इस टिप्पणी के बाद, वकील ने अदालत को एक निजी निवास का पता देने पर सहमति व्यक्त की।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अंतरिम जमानत की शर्तों में बदलाव का विरोध किया। एनआईए के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि अंतरिम जमानत 6 मई को समाप्त हो रही है और याचिकाकर्ता के पिता की स्थिति अब स्थिर है, इसलिए शर्तों में बदलाव की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है।
एनआईए ने आगे सुझाव दिया कि यदि राशिद अपने पिता से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें जेल से ही ‘कस्टडी पैरोल’ पर ले जाया जा सकता है, न कि अंतरिम जमानत के माध्यम से। कस्टडी पैरोल के तहत कैदी को सशस्त्र पुलिस कर्मियों की निगरानी में संबंधित स्थान पर ले जाया जाता है।
इंजीनियर राशिद 2017 के टेरर फंडिंग मामले में एनआईए द्वारा गिरफ्तारी के बाद 2019 से हिरासत में हैं। उन पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को वित्त पोषित करने का आरोप है। मार्च 2022 में, एक विशेष एनआईए अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक साजिश (120बी), सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना (121) और राजद्रोह (124ए) के साथ-साथ यूएपीए (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।
हाईकोर्ट ने राशिद को एक स्थानीय निजी पता देने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए तय की है।

