सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की उस याचिका को निस्तारित कर दिया, जिसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस पाने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि पासपोर्ट उनकी जमानत की शर्त के रूप में न्यायिक हिरासत में जमा है, इसलिए बिना किसी निश्चित यात्रा कार्यक्रम और विदेश जाने के ठोस कारण के इसे वापस नहीं किया जा सकता।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे की तीन सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने सीतलवाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या उनकी मुवक्किल की निकट भविष्य में विदेश जाने की कोई योजना है।
पीठ ने सिब्बल से कहा, “क्या आप जल्द ही कहीं बाहर जाने वाली हैं? जैसे ही आप अपना यात्रा कार्यक्रम तय कर लें, हमें बताएं। हम इस तरह पासपोर्ट वापस नहीं करेंगे।”
अदालत ने आगे जोर देते हुए कहा कि दस्तावेज जारी करने से पहले ठोस विवरण देना अनिवार्य है। पीठ ने टिप्पणी की, “आपको हमें बताना होगा कि आपको किस देश की यात्रा करनी है। विदेश यात्रा के लिए आपको अपना पासपोर्ट वापस चाहिए, तो इसके लिए आपको एक आधार पेश करना होगा।”
जवाब में सिब्बल ने स्वीकार किया कि सीतलवाड़ को किसी भी विदेश यात्रा के लिए अदालत से अनुमति लेना आवश्यक है। आवेदन को निस्तारित करते हुए पीठ ने सीतलवाड़ को यह स्वतंत्रता दी कि जब भी वह विदेश यात्रा करना चाहें और उनके पास एक तय कार्यक्रम हो, तो वह नई अर्जी दाखिल कर सकती हैं।
सीतलवाड़ ने यह याचिका 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए दस्तावेजों की कथित जालसाजी से जुड़े मामले के संदर्भ में दायर की थी।
19 जुलाई, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को नियमित जमानत दी थी। उस समय शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को ‘विकृत’ और ‘विरोधाभासी’ बताया था, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आरोप पत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और अधिकांश साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं।
हालांकि, यह जमानत कड़ी शर्तों के साथ दी गई थी, जिसमें सत्र अदालत में पासपोर्ट जमा करना और गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश शामिल था।
सीतलवाड़, पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और गुजरात के पूर्व डीजीपी आर.बी. श्रीकुमार के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) 24 जून, 2022 को जकिया जाफरी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों के बाद दर्ज की गई थी।
पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी ने 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। अपने 2022 के फैसले में, शीर्ष अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) के निष्कर्षों के खिलाफ जाफरी की याचिका को खारिज कर दिया था और टिप्पणी की थी कि कुछ लोगों ने ‘स्वार्थ’ के लिए मामले को ‘गरमाए रखा’। अदालत ने कहा था कि प्रक्रिया के ऐसे दुरुपयोग में शामिल सभी लोगों को ‘कटघरे में’ खड़ा करने की जरूरत है। इस फैसले के अगले ही दिन सीतलवाड़ को गिरफ्तार कर लिया गया था।

