इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि आर्बिट्रेटर (मध्यस्थ) की नियुक्ति के लिए पक्षकार द्वारा दी गई महज सहमति, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 12(5) के तहत अयोग्यता को समाप्त करने वाली ‘स्पष्ट छूट’ (Express Waiver) नहीं मानी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत
