नेस्को म्यूजिक कॉन्सर्ट हादसा: ‘अवैध’ गिरफ्तारी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे दो अधिकारी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को (NESCO) एग्जीबिशन सेंटर में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो छात्रों की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए नेस्को के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी गिरफ्तारी को “अवैध” बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

गिरफ्तार अधिकारियों में नेस्को एग्जीबिशन के वाइस प्रेसिडेंट (लाइव इवेंट्स) बालकृष्ण बलराम कुरुप (46) और सीनियर मैनेजर सनी जैन (31) शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।

यह घटना 11 अप्रैल की है, जब नेस्को एग्जीबिशन सेंटर में एक म्यूजिक कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में शामिल होने आए दक्षिण मुंबई के एक प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल के दो एमबीए छात्रों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि दोनों छात्रों ने प्रतिबंधित ड्रग ‘एमडीएमए’ (MDMA/Ecstasy) का सेवन किया था, जिसके ओवरडोज के कारण उनकी जान चली गई।

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पुलिस ने इस सिलसिले में 13 अप्रैल को कुरुप और जैन को गिरफ्तार किया था। फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।

अधिवक्ता ऋषि भूता के माध्यम से दायर इस याचिका में अधिकारियों ने दावा किया है कि वे केवल अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे और ड्रग्स से संबंधित किसी भी गतिविधि में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं:

  • सख्त पाबंदी का तर्क: अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि कार्यक्रम स्थल पर नशीले पदार्थों का सेवन या कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित था। इसकी जानकारी टिकटों पर स्पष्ट रूप से छपी थी और आयोजन स्थल पर भी इसके बोर्ड लगाए गए थे।
  • बरामदगी का अभाव: याचिका में कहा गया है कि उनके पास से कोई प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है और न ही ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से उनका कोई लेना-देना है।
  • गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के कारणों (Grounds of Arrest) की जानकारी देने से संबंधित अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
  • भाषा की बाधा: केरल मूल के बालकृष्ण कुरुप ने तर्क दिया कि उनकी गिरफ्तारी के आधार मराठी भाषा में दिए गए थे, जिसे वे नहीं समझते। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें उनकी भाषा में इन आधारों के बारे में नहीं समझाया गया।
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अधिकारियों ने अदालत से अपनी गिरफ्तारी को रद्द करने और जमानत देने की मांग की है।

यह मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि क्या किसी सार्वजनिक आयोजन में शामिल लोगों की अवैध गतिविधियों के लिए आयोजन स्थल के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। साथ ही, बॉम्बे हाईकोर्ट इस संवैधानिक पहलू पर भी विचार करेगा कि क्या गिरफ्तारी के आधारों को आरोपी की समझ वाली भाषा में न बताना गिरफ्तारी को अवैध बनाता है।

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