केरला हाईकोर्ट: ₹80 करोड़ के काजू घोटाले में बड़ी कार्रवाई, उद्योग सचिव के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू

केरला हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद हनीश के खिलाफ सिविल अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। यह मामला केरल राज्य काजू विकास निगम (KSCDC) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से बार-बार इनकार करने से जुड़ा है। अदालत ने पाया कि अधिकारी ने ₹80 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपियों को बचाने के लिए न्यायिक निर्देशों की “जानबूझकर अवज्ञा” की है।

इस कानूनी विवाद की जड़ें साल 2011 में हुए कच्चे काजू की खरीद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ी हैं। कोल्लम निवासी कड़कमपल्ली मनोज द्वारा 2015 में दायर एक याचिका के बाद, हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। जांच में KSCDC के पूर्व प्रबंध निदेशक के.ए. रतीश और पूर्व अध्यक्ष आर. चंद्रशेखरन पर ₹80 करोड़ के दुरुपयोग के आरोप लगे थे।

साल 2024 में हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में सरकार के उन पुराने आदेशों को रद्द कर दिया था जिनमें इन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार किया गया था। अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक मंजूरी दी जाए।

अदालत के 2024 के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, उद्योग विभाग ने अक्टूबर (हालिया दस्तावेजों के अनुसार 2025) में एक नया आदेश पारित कर फिर से अभियोजन की मंजूरी देने से मना कर दिया। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि सरकार इस मामले में मंजूरी देने के लिए “बेहद अनिच्छुक” नजर आ रही है, जबकि प्रथम दृष्टया साक्ष्य आरोपियों द्वारा अपराध किए जाने की पुष्टि करते हैं।

हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार “अज्ञात कारणों” से मंजूरी देने में संकोच कर रही है और उसका यह रुख “मनमाना, जनहित के विरुद्ध और अदालत के पिछले निष्कर्षों का घोर उल्लंघन” है।

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जस्टिस बदरुद्दीन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

“इस अदालत का अपरिहार्य निष्कर्ष यह है कि सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिवादी (अधिकारी) ने इस अदालत द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं किया… और जानबूझकर निर्देशों की अवज्ञा की, जिससे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत सिविल अवमानना का अपराध बनता है।”

हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव द्वारा जारी अक्टूबर के आदेश को रद्द कर दिया है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे 2024 के फैसले के आलोक में इस मामले पर पुनर्विचार करें।

अदालत द्वारा जारी मुख्य निर्देश निम्नलिखित हैं:

  1. प्रधान सचिव को अभियोजन की मंजूरी के संबंध में 18 मई या उससे पहले एक नया और स्पष्ट आदेश जारी करना होगा।
  2. उद्योग विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद हनीश को सिविल अवमानना की कार्यवाही के सिलसिले में 18 मई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष पेश होना होगा।

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