पोंडा विधानसभा उपचुनाव को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को गोवा की पोंडा विधानसभा सीट के लिए आगामी उपचुनाव को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली। स्थानीय मतदाताओं द्वारा दायर इन याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि यह उपचुनाव “अवैध और असंवैधानिक” है क्योंकि नवनिर्वाचित विधायक का कार्यकाल एक वर्ष से भी कम का होगा।

जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं, राज्य सरकार और एक मध्यस्थ (intervener) की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

पोंडा निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव 9 अप्रैल, 2026 को होना तय है। यह सीट तत्कालीन राज्य कृषि मंत्री रवि नाइक के अक्टूबर 2025 में हुए निधन के बाद खाली हुई थी।

इस कानूनी चुनौती का मुख्य आधार चुनाव कानूनों के तहत सीट के शेष कार्यकाल की व्याख्या है। नियम के अनुसार, रिक्ति होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए। हालांकि, इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि यदि रिक्ति का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम है, तो चुनाव नहीं कराया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता अंकिता कामत का प्रतिनिधित्व करते हुए वकील नितिन सरदेसाई ने तर्क दिया कि यह उपचुनाव “पूरी तरह से अवैध, मनमाना और असंवैधानिक” है।

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याचिकाकर्ताओं ने निम्नलिखित घटनाक्रम की ओर ध्यान आकर्षित किया:

  • पद खाली हुआ: अक्टूबर 2025 (रवि नाइक का निधन)।
  • निर्धारित चुनाव: 9 अप्रैल, 2026।
  • विधानसभा का कार्यकाल समाप्त: मार्च 2027।

सरदेसाई ने दलील दी कि चूंकि नया विधायक लगभग मई 2026 में कार्यभार संभालेगा, इसलिए मार्च 2027 में होने वाले अगले सामान्य विधानसभा चुनावों से पहले उनके पास कार्यालय में केवल दस महीने का समय होगा।

सरदेसाई ने कहा, “कानून कहता है कि यदि शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम है, तो आप चुनाव नहीं करा सकते।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि इतने कम समय के लिए चुनाव कराने से सरकारी खजाने को “अनावश्यक नुकसान” होता है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की इस पर एक अलग व्याख्या है। आयोग के अनुसार, कार्यकाल की गणना उस तारीख से की जानी चाहिए जब सीट पहली बार खाली हुई थी (अक्टूबर 2025), न कि उस तारीख से जब नया सदस्य शपथ लेता है। इस गणना के आधार पर, रिक्ति के समय शेष कार्यकाल एक वर्ष से अधिक था।

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कार्यवाही के दौरान यह भी गौर किया गया कि राज्य सरकार ने इन याचिकाओं के जवाब में कोई हलफनामा (affidavit) दायर नहीं किया है।

हाईकोर्ट का आगामी फैसला यह तय करेगा कि पोंडा के मतदाता अगले महीने मतदान करेंगे या यह सीट 2027 के आम चुनावों तक खाली रहेगी।

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