निजी संपत्ति पर ‘बड़ी संख्या’ में नमाज न पढ़ने के हलफनामे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के एक निवासी द्वारा अपनी निजी संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी भीड़ इकट्ठा न करने का हलफनामा (undertaking) देने के बाद संबंधित रिट याचिका को निस्तारित कर दिया है।

जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 25 मार्च के अपने आदेश में राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता तारिक खान और अन्य के खिलाफ 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए पुलिस चालान को तत्काल वापस लिया जाए। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को जारी अवमानना नोटिस को भी उनके व्यक्तिगत हलफनामे और पेशी के बाद समाप्त कर दिया है।

यह मामला तारिक खान द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें उनके रिश्तेदार हसीन खान की संपत्ति पर नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। मामले में मुख्य विवाद इस बात पर था कि क्या निजी आवास पर धार्मिक प्रार्थना के लिए बड़ी संख्या में लोगों का जुटना क्षेत्र की “शांति और व्यवस्था” के लिए खतरा पैदा करता है। याचिकाकर्ता द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि वह वहां बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेंगे, हाईकोर्ट ने मामले को समाप्त कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस हलफनामे का उल्लंघन होता है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

विवाद 16 जनवरी 2026 को तब बढ़ा, जब बरेली प्रशासन ने हसीन खान की संपत्ति पर नमाज अदा कर रहे तारिक खान और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस चालान जारी किया। इसके बाद, 11 मार्च को हाईकोर्ट ने हसीन खान के परिवार और संपत्ति की सुरक्षा के निर्देश दिए थे, क्योंकि उन्होंने सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी।

हालांकि, हालिया सुनवाई के दौरान मामले ने तब नया मोड़ लिया जब राज्य सरकार ने उक्त स्थल पर बड़े पैमाने पर होने वाली भीड़ के साक्ष्य पेश किए।

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राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) अनूप त्रिवेदी ने तर्क दिया कि हसीन खान को प्रदान की गई सुरक्षा का “दुरुपयोग” किया जा रहा था। अपनी बात की पुष्टि के लिए राज्य ने जिलाधिकारी और SSP के व्यक्तिगत हलफनामों के साथ संपत्ति की तस्वीरें रिकॉर्ड पर रखीं।

AAG ने अदालत में निम्नलिखित दलीलें दीं:

  • उक्त संपत्ति पर प्रतिदिन लगभग 52 से 62 लोग नमाज अदा कर रहे थे।
  • इस तरह का निरंतर अभ्यास “क्षेत्र की शांति और सद्भाव के लिए हानिकारक” था।
  • कानून-व्यवस्था बिगड़ने की किसी भी संभावना को देखते हुए राज्य अधिकारियों के पास कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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इसके जवाब में, याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को एक औपचारिक हलफनामा देते हुए कहा कि तारिक खान “संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेंगे।” वकील ने यह भी बताया कि अब हसीन खान को उस सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है जो पहले अनिवार्य की गई थी।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया और स्थानीय सद्भाव बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:

“हमें उम्मीद और विश्वास है कि याचिकाकर्ता अपने द्वारा दिए गए हलफनामे का पालन करेगा। यदि याचिकाकर्ता उक्त हलफनामे का उल्लंघन करता है और संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करता है और यदि क्षेत्र की शांति के लिए कोई खतरा पैदा होता है, तो प्रतिवादी अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

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हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. चालान की वापसी: राज्य अधिकारी 16 जनवरी 2026 के पुलिस चालान को तत्काल वापस लें।
  2. सुरक्षा हटाना: 11 मार्च के निर्देश के तहत हसीन खान को प्रदान की गई सुरक्षा तत्काल वापस ली जाए।
  3. अवमानना का निपटारा: बरेली के DM और SSP द्वारा व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और अदालत में पेश होने के बाद उनके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस समाप्त किए गए।

इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने रिट याचिका को निस्तारित कर दिया।

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