दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व अध्यक्ष ई अबुबकर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जेल से किसी निजी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी उचित चिकित्सा मूल्यांकन का हकदार है और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के सरकारी अस्पतालों में आवश्यक उपचार सुनिश्चित करें।
ई अबुबकर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 22 सितंबर, 2022 को PFI के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था। वह वर्तमान में कड़े आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं। NIA के अनुसार, PFI और उसके सदस्यों ने आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और कैडरों को प्रशिक्षित करने की आपराधिक साजिश रची थी। केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में PFI पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
अबुबकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी गंभीर बीमारियों का हवाला देते हुए निजी अस्पताल में इलाज कराने और एक परिजन को अटेंडेंट के रूप में साथ रहने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि AIIMS में उनका अनुभव “विनाशकारी” रहा और उन्हें खांसी, सांस फूलने और अनियंत्रित ब्लड शुगर जैसी समस्याओं के लिए सही उपचार नहीं मिल रहा है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना आवश्यक है। इसके विपरीत, अदालत ने पाया कि अबुबकर को लगातार डीडीयू अस्पताल, सफदरजंग और AIIMS जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में उपचार दिया गया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जो AIIMS द्वारा दिए जा रहे उपचार में किसी कमी या अपर्याप्तता को दर्शाता हो। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि निजी अस्पताल जाने की मांग आंशिक रूप से इस आरोप पर आधारित थी कि कुछ चिकित्सा कर्मियों का व्यवहार “अमर्यादित” था, जो किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान से तबादले का आधार नहीं हो सकता।
अदालत ने न्यायिक मिसाल का हवाला देते हुए कहा:
“माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा AIIMS में उपचार के पिछले निर्देशों और इस न्यायालय की पूर्ववर्ती पीठ द्वारा केवल दूसरी राय (second opinion) लेने की अनुमति देने के आदेशों के आलोक में, इस न्यायालय को वर्तमान प्रार्थना में कोई योग्यता नहीं दिखती।”
27 मार्च को पारित अपने फैसले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि अबुबकर का उपचार AIIMS में ही जारी रहेगा। हालांकि, अदालत ने उन्हें इस सप्ताह एक निजी अस्पताल में केवल दूसरी चिकित्सा राय प्राप्त करने के लिए ले जाने की अनुमति दी है।
कैदी के अधिकारों और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए:
- परिवार को सूचना: जेल अधिकारियों को अबुबकर को अस्पताल ले जाने पर, विशेषकर आपात स्थिति में, उनके परिवार को तुरंत सूचित करना होगा।
- परिजन की उपस्थिति: निजी अस्पताल में दूसरी राय लेने के दौरान उनके बेटे को उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है।
- उपचार में देरी न हो: कोर्ट ने निर्देश दिया कि “याचिकाकर्ता को जेल अधिकारियों और संबंधित सरकारी अस्पतालों के माध्यम से आवश्यकतानुसार सभी आवश्यक चिकित्सा उपचार बिना किसी देरी के मिलते रहने चाहिए।”
यह आदेश फरवरी 2024 के पिछले निर्देश के क्रम में है, जिसमें कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधीक्षक को प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने का आदेश दिया था, लेकिन अबुबकर की नजरबंदी (house arrest) की मांग को ठुकरा दिया था।

