इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता आशुतोष कुमार मिश्रा के विरुद्ध चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को उनकी “बिना शर्त और अटूट” माफी के बाद समाप्त कर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने अधिवक्ता के पश्चातापपूर्ण व्यवहार और भविष्य में ऐसी घटना न दोहराने के व्यक्तिगत आश्वासन को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 12 फरवरी, 2026 को एक जमानत याचिका (क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 5069/2026) की सुनवाई के दौरान हुई एक घटना से जुड़ा है। अधिवक्ता आशुतोष कुमार मिश्रा (AOR No. A/A 1461/2012) ‘कुणाल’ नामक एक आवेदक की पैरवी कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने सरकारी वकील (AGA) को तीन सप्ताह के भीतर साक्ष्य, चोट की रिपोर्ट और बयानों के साथ जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया, तब अधिवक्ता मिश्रा ने कथित तौर पर खुली अदालत में ऊंची आवाज में न्यायाधीश को संबोधित करते हुए कहा:
“आप इस मामले में जवाबी हलफनामा क्यों मांग रहे हैं? आपके पास संबंधित जांच अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने का साहस नहीं है, जिसने आज तक घायल का बयान दर्ज नहीं किया है। आपके (जज) पास जांच अधिकारी के खिलाफ कोई भी आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि आप सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।”
अदालत की टिप्पणियां और विश्लेषण
जिस एकल न्यायाधीश की पीठ के समक्ष ये शब्द कहे गए, उन्होंने इसे अपमानजनक माना और निष्कर्ष निकाला कि श्री मिश्रा का इरादा “न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करना” था। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया उनके व्यवहार को आपराधिक अवमानना के दायरे में माना और मामला उपयुक्त कार्रवाई हेतु माननीय मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया, जिसके बाद इसे वर्तमान खंडपीठ के समक्ष रखा गया।
पक्षकारों की दलीलें और माफीनामा
25 मार्च, 2026 को सुनवाई के दौरान कथित अवमाननाकर्ता अपने वकील श्री श्रीकांत शुक्ला और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हुए।
अधिवक्ता मिश्रा ने एक हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी। उनके वकील ने दलील दी कि श्री मिश्रा अपने आचरण के लिए बेहद क्षमाप्रार्थी हैं और उन्होंने “सपने में भी कभी इस तरह के व्यवहार के बारे में नहीं सोचा था जैसा उन्होंने 12 फरवरी को किया।”
अदालत ने अधिवक्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति और उनके व्यवहार पर गौर करते हुए कहा:
“उनके हाव-भाव (demeanor) से हमें पता चलता है कि वह क्षमाप्रार्थी हैं और वह अपने दिल से माफी मांग रहे हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कहा कि 12.2.2026 जैसी घटना दोबारा कभी नहीं होगी।”
हाईकोर्ट का निर्णय
खंडपीठ ने अधिवक्ता द्वारा दी गई बिना शर्त माफी और भविष्य में अदालत की गरिमा बनाए रखने के उनके संकल्प को स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया, “आज खुली अदालत में मांगी गई माफी पर विचार करते हुए हमारा विचार है कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही अब समाप्त कर दी जाए। माफी स्वीकार किए जाने के बाद कार्यवाही समाप्त की जाती है।”
इसके साथ ही अदालत ने मामले को रिकॉर्ड में सुरक्षित (consign to records) करने का निर्देश दिया।
केस विवरण:
- केस शीर्षक: इन री बनाम आशुतोष कुमार मिश्रा (In Re v. Ashutosh Kumar Mishra)
- केस संख्या: आपराधिक अवमानना आवेदन संख्या 4/2026
- बेंच: न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय
- दिनांक: 25 मार्च, 2026

