इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-हाजिरी के कारण 18 साल पुरानी रिट याचिका को निष्प्रभावी करार देते हुए खारिज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने, जस्टिस मंजू रानी चौहान की अध्यक्षता में, 2008 से लंबित एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब पुराने मामलों की प्राथमिकता के आधार पर हो रही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और उनके वकील उपस्थित नहीं हुए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पैरवी के अभाव से ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने मामले में रुचि खो दी है या लगभग दो दशकों की लंबी अवधि के बाद यह मामला अब निष्प्रभावी हो चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अनिल कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (WRITA No. 12196 of 2008) से संबंधित है, जो कोर्ट नंबर 52 में सूचीबद्ध था। वर्ष 2008 में दायर होने के कारण, इस मामले को ‘सबसे पुराने लंबित मामलों’ की श्रेणी में रखा गया था और 24 मार्च, 2026 को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए तय किया गया था।

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हाईकोर्ट का विश्लेषण

जब सुनवाई के लिए मामला पुकारा गया, तो न तो याचिकाकर्ता और न ही प्रतिवादियों की ओर से कोई उपस्थित हुआ। हाईकोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड में लिया कि नोटिस बोर्ड पर पहले से ही एक विशिष्ट सूचना चस्पा की गई थी।

उस सूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया था:

“वर्ष 2022 तक के पुराने मामलों को पहले चरण में ही लिया जाएगा। गैर-हाजिरी की स्थिति में, मामले को निष्प्रभावी या अन्य आधार पर खारिज कर दिया जाएगा, और जिन मामलों में वाद-हेतु (cause of action) अभी भी जीवित है, संबंधित अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे वाद सूची में तदनुसार निशान लगाएं। ऐसा करने में विफल रहने पर मामले को निष्प्रभावी मानकर खारिज किया जा सकता है।”

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जस्टिस चौहान ने गौर किया कि इस सूचना के बावजूद, याचिकाकर्ता के वकील पेश नहीं हुए और न ही मामले को ‘जीवित’ बताने के लिए कोई निशान लगाया गया। 18 साल की लंबी पेंडेंसी पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“रिकॉर्ड से पता चलता है कि मामला वर्ष 2008 से लंबित है। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो याचिकाकर्ता की मामले को आगे बढ़ाने में रुचि खत्म हो गई है या यह निष्प्रभावी हो चुका है।”

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अदालत का निर्णय

परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने रिट याचिका को निष्प्रभावी करार देते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि यदि मामले का कारण अभी भी जीवित है, तो याचिकाकर्ता “पुनः बहाली (recall/restoration) आवेदन दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होगा।”

केस विवरण विवरण (Case Details Block)

  • केस का शीर्षक: अनिल कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य
  • केस संख्या: WRITA No. 12196 of 2008
  • पीठ: जस्टिस मंजू रानी चौहान
  • याचिकाकर्ता के वकील: अमिताभ कुमार तिवारी, धीरज बहादुर सिंह
  • प्रतिवादी के वकील: बी.पी. सिंह, सी.एस.सी.
  • दिनांक: 24 मार्च, 2026

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