सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की उस याचिका पर विचार करने के लिए सहमति दे दी है, जिसमें वकीलों के लिए एक समर्पित ‘वेलफेयर फंड’ (कल्याण कोष) बनाने की मांग की गई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) और सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से स्वीकार किया कि वकीलों के लिए ऐसे किसी फंड की स्थापना “समय की जरूरत” (Need of the hour) है।
मौजूदा व्यवस्था में विसंगति और ‘सुरक्षा चक्र’ का अभाव
SCBA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत को बताया कि ‘एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट, 2001’ में एक तकनीकी खामी है, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। वर्तमान में यह अधिनियम राज्य बार काउंसिलों के माध्यम से संचालित होता है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए वकील का किसी राज्य बार एसोसिएशन का सदस्य होना अनिवार्य है, जबकि SCBA को इस कानून के तहत स्वतंत्र दर्जा प्राप्त नहीं है।
याचिका में इस विसंगति को रेखांकित करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाले ‘वकालतनामे’ के जरिए जो राशि जमा होती है, वह वर्तमान में दिल्ली बार काउंसिल को जाती है। इससे उन वकीलों के लिए संकट खड़ा हो जाता है जो अपने गृह राज्यों की बार काउंसिलों से दूर राजधानी में प्रैक्टिस कर रहे हैं। मेडिकल इमरजेंसी या किसी अन्य अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय उनके पास कोई ठोस सुरक्षा ढांचा नहीं होता।
‘लॉयर्स वेलफेयर स्टैंप’ और प्रस्तावित सुधार
अदालत ने कार्यवाही के दौरान संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 में संशोधन करके और इसमें एक नया नियम (रूल 15A) जोड़कर इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
SCBA ने अपनी याचिका में एक व्यवस्थित और अधिकार-आधारित ढांचे का प्रस्ताव रखा है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अनिवार्य वेलफेयर स्टैंप: सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाले प्रत्येक वकालतनामे पर 500 रुपये का ‘लॉयर्स वेलफेयर स्टैंप’ लगाना अनिवार्य किया जाए।
- प्रबंधन समिति: इस कल्याण कोष के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए, जिसके प्रमुख भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उनके द्वारा नामित कोई प्रतिनिधि हों। इससे कोष के संचालन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
- नियमों में बदलाव: सुप्रीम कोर्ट के नियमों की परिभाषाओं और अनुसूची-III में आवश्यक संशोधन किए जाएं ताकि इस फंड को कानूनी मान्यता मिल सके।
इस याचिका के माध्यम से SCBA का लक्ष्य दान या विवेकाधीन सहायता पर निर्भर रहने के बजाय एक अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित करना है। वकील प्रज्ञा बघेल के माध्यम से दायर यह याचिका शीर्ष अदालत के वकीलों के अधिकारों को औपचारिक रूप देने का एक बड़ा प्रयास है।

