अलीगढ़ स्कूल बस हादसे में बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने RTO वंदना के निलंबन पर लगाई रोक

लाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अलीगढ़ की रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (RTO) वंदना के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। वंदना को फरवरी 2026 में हुए एक दुखद स्कूल बस हादसे के बाद निलंबित कर दिया गया था, जिसमें एक मासूम बच्चे की जान चली गई थी।

जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने 1 मार्च, 2026 के निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने अधिकारी को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच जारी रह सकती है और अपने निष्कर्ष तक पहुंच सकती है।

यह मामला 28 फरवरी, 2026 को अलीगढ़ में हुई एक हृदयविदारक घटना से जुड़ा है। एक निजी स्कूल बस के फर्श का हिस्सा टूटा हुआ था, जिससे गिरकर एक बच्चे की मृत्यु हो गई थी। घटना के अगले ही दिन, राज्य सरकार ने विभागीय जांच शुरू करते हुए RTO वंदना को पद से निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के विरुद्ध वंदना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन इसके लिए RTO को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

READ ALSO  COVID19- यूपी के गावों में चिकित्सा व्यवस्था 'राम भरोसे': इलाहाबाद हाई कोर्ट

बहस के दौरान मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • सीधी भूमिका का अभाव: याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस दुर्घटना में RTO की कोई सीधी संलिप्तता या लापरवाही नहीं थी।
  • जिम्मेदारी का बंटवारा: परिवहन नियमों का हवाला देते हुए वकील ने कहा कि वाहनों का भौतिक निरीक्षण और फिटनेस प्रमाणन करना ‘नामित निरीक्षण अधिकारियों’ (Inspecting Officers) का काम है, न कि सीधे तौर पर RTO का।
  • कदाचार के आरोप का आधार: चूंकि निरीक्षण का कार्य उनके सीधे कार्यक्षेत्र में नहीं आता, इसलिए इस मामले में उनके ऊपर किसी भी प्रकार के कदाचार या लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
READ ALSO  चंदा कोचर को अंतरिम राहत से आईसीआईसीआई बैंक को अपूरणीय क्षति होगी, हाईकोर्ट ने कहा; सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ की याचिका खारिज

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील इन कानूनी दलीलों का कोई प्रभावी खंडन पेश नहीं कर पाए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस मनीष माथुर ने कहा कि इस मामले पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार पेश किए हैं कि वाहन निरीक्षण प्रक्रिया में एक RTO की जिम्मेदारी की सीमाएं क्या हैं।

अपने अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा:

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायुसेना के एयरमैन को वरिष्ठ अधिकारी के वाहन को ओवरटेक करने के मामले में अनावश्यक मुकदमे के लिए ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया

“1 मार्च, 2026 के निलंबन आदेश का क्रियान्वयन अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा।”

हालांकि, कोर्ट ने प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरी तरह बाधित नहीं किया और कहा:

“याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच की कार्यवाही को जारी रखने या उसे समाप्त करने पर कोई रोक नहीं होगी।”

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles