सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार पात्रता परीक्षा (Qualifying Exam) में अंकों की छूट का लाभ लेकर सफल होते हैं, लेकिन मुख्य चयन परीक्षा में उनकी मेधा (Merit) सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक है, तो वे सामान्य/अनारक्षित श्रेणी में स्थान पाने के हकदार हैं।
जस्टिस पमिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें ऐसे उम्मीदवारों को ‘माइग्रेशन’ (Migration) से रोका गया था। कोर्ट ने कहा कि पात्रता परीक्षा में दी गई छूट केवल “विचार के क्षेत्र” (Zone of Consideration) में प्रवेश का एक माध्यम है और इसका मुख्य परीक्षा के आधार पर तय होने वाली मेधा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद महाराष्ट्र में ‘शिक्षक अभिरुचि और बुद्धिमत्ता परीक्षण, 2022’ (TAIT) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। भर्ती के नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों के लिए ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य था।
नियमों के तहत, सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को TET पास करने के लिए 60% अंकों की आवश्यकता थी, जबकि आरक्षित श्रेणियों को 5% की छूट के साथ 55% अंक लाने थे। अपीलकर्ताओं (आरक्षित वर्ग) ने 55% अंकों के साथ TET पास किया और फिर मुख्य परीक्षा (TAIT) में भाग लिया। TAIT में उनके अंक सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक थे। इसके बावजूद, 25 फरवरी 2024 को जारी मेरिट लिस्ट में उन्हें सामान्य श्रेणी में जगह नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने TET में छूट ली थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट (औरंगाबाद बेंच) ने 14 फरवरी 2025 को याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाईकोर्ट ने गवर्नमेंट ऑफ (NCT ऑफ दिल्ली) बनाम प्रदीप कुमार मामले का हवाला देते हुए कहा था कि TET में छूट लेने वाले उम्मीदवार ओपन कैटेगरी के लिए पात्र नहीं रह जाते।
पक्षों के तर्क
अपीलकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि ओपन कैटेगरी किसी एक वर्ग का कोटा नहीं है, बल्कि यह मेधा (Merit) की श्रेणी है। पात्रता परीक्षा में दी गई छूट का उद्देश्य केवल सभी को समान अवसर प्रदान करना (Level Playing Field) है, न कि मेधावी उम्मीदवारों को मुख्य चयन प्रक्रिया से बाहर करना।
दूसरी ओर, प्रतिवादियों (महाराष्ट्र सरकार) ने तर्क दिया कि TET एक अनिवार्य योग्यता है। उनका कहना था कि जिन उम्मीदवारों ने पात्रता के मानकों में छूट ली है, वे सामान्य श्रेणी में नहीं जा सकते क्योंकि यह आरक्षण का “दोहरा लाभ” देने जैसा होगा।
कोर्ट का विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि NCTE के दिशा-निर्देशों में राज्य सरकारों को आरक्षित वर्गों के लिए अंकों में रियायत देने की शक्ति दी गई है। कोर्ट ने जितेंद्र कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और विकास सांखला बनाम विकास कुमार अग्रवाल जैसे मामलों के कानूनी सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा:
“पात्रता परीक्षा में रियायत/छूट केवल उम्मीदवार को विचार के क्षेत्र में प्रवेश करने में सक्षम बनाती है और इसे लिखित परीक्षा के मेधा मानकों में छूट के रूप में नहीं माना जा सकता, यदि ऐसी छूट मुख्य परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर तय होने वाली मेधा को प्रभावित नहीं करती है।”
पीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा (TAIT) में किसी भी वर्ग को कोई अंक संबंधी छूट नहीं दी गई थी और वहां सभी का मूल्यांकन एक समान मानकों पर किया गया था।
पूर्व उदाहरणों की गलत व्याख्या
कोर्ट ने पाया कि बॉम्बे हाईकोर्ट और शिक्षा आयुक्त ने प्रदीप कुमार (2019) के फैसले को समझने में चूक की। उस मामले में उम्मीदवारों के पास न तो दिल्ली का OBC प्रमाणपत्र था और न ही उन्होंने 60% अंकों की अनिवार्य पात्रता पूरी की थी। वर्तमान मामले के संदर्भ में कोर्ट ने टिप्पणी की:
“वर्तमान मामले में, TET में 60% अंक प्राप्त करना एक अनिवार्य पात्रता शर्त नहीं है क्योंकि NCTE के दिशा-निर्देश स्वयं इस तरह की छूट की अनुमति देते हैं… ऐसी छूट केवल आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को TAIT में भाग लेने के योग्य बनाती है।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जब तक भर्ती नियमों या अधिसूचना में स्पष्ट रूप से रोक न हो, तब तक मेधावी आरक्षित उम्मीदवारों का सामान्य श्रेणी में जाना पूरी तरह वैध है।
अदालत का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी 2025 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया:
“प्रतिवादी उन अपीलकर्ताओं को मेरिट लिस्ट में शामिल करेंगे, जिन्होंने सामान्य श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।”
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पात्रता मानदंड में छूट केवल ‘योग्यता’ (Eligibility) को प्रभावित करती है, ‘मेधा’ (Merit) को नहीं। इसी के साथ सभी अपीलें स्वीकार कर ली गईं।
मामले का विवरण:
- केस शीर्षक: छाया एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य
- केस संख्या: सिविल अपील संख्या ___ ऑफ 2026 (@SLP (C) संख्या 14517-14539 ऑफ 2025)
- पीठ: जस्टिस पमिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे
- फैसले की तारीख: 23 मार्च, 2026

