दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर अनुकूल कैब की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिव्यांगजनों के लिए परिवहन सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि कैब सेवाओं को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वे व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों को आसानी से समायोजित कर सकें। यह टिप्पणी प्रथम और अंतिम माइल कनेक्टिविटी से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था को समावेशी बनाना समय की मांग है। अदालत ने यह भी कहा कि महानगरों में कैब सेवाएं अब आम हो चुकी हैं, ऐसे में इन्हें दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाना जरूरी है।

पीठ ने स्पष्ट कहा, “अब बड़े शहरों में हर जगह कैब उपलब्ध हैं। इन कैब में व्हीलचेयर या अन्य सहायक उपकरण रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।” अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि कैब एग्रीगेटर ऐप्स में विशेष रूप से ऐसे वाहनों का विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है जो दिव्यांगजनों के लिए अनुकूलित हों।

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अदालत ने कहा, “ऐप्स में ऐसे विशेष कैब का विकल्प होना चाहिए जिन्हें इन व्यक्तियों की जरूरतों के अनुसार संशोधित किया गया हो। हमें उनकी मदद के लिए व्यावहारिक तरीके तलाशने होंगे।”

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा कैब सेवाओं में कई व्यावहारिक समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर कैब सीएनजी से संचालित होती हैं, जिससे डिक्की में पर्याप्त जगह नहीं होती और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो जाता है।

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उन्होंने यूरोपीय देशों में लागू यूनिवर्सल डिजाइन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस पर अदालत ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया, “मान लीजिए किसी व्यक्ति का घर मुख्य सड़क से एक किलोमीटर दूर है और वह ऑटोमेटेड व्हीलचेयर पर आता है। अगर वह उसे कैब में नहीं रख सकता, तो उसे कहां छोड़ेगा?”

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि इन मुद्दों पर संबंधित विभाग द्वारा विचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक समिति पहले से ही इसी तरह के व्यापक मुद्दों पर विचार कर रही है।

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पीठ ने संकेत दिया कि इस याचिका में उठाए गए सवालों को भी उसी समिति के दायरे में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका मामला विशेष रूप से अंतिम माइल कनेक्टिविटी से जुड़ा है, लेकिन अदालत ने कहा कि यह मुद्दा भी व्यापक चर्चा के तहत लिया जा सकता है।

अदालत ने यह भी माना कि आज के समय में कैब सेवाएं सार्वजनिक परिवहन का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं, इसलिए इन्हें सभी के लिए सुलभ बनाना आवश्यक है।

मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की गई है।

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