वर्सोवा-भायंदर रोड प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, 45,000 मैंग्रोव हटाने की याचिका खारिज

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें वर्सोवा-भायंदर रोड प्रोजेक्ट के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को 45,000 से अधिक मैंग्रोव हटाने की अनुमति दी गई थी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्तावित सड़क आम जनता के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगी और इससे उत्तर मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।

यह फैसला उन पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने 12 दिसंबर, 2025 को आए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए बीएमसी पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बीएमसी को हर साल हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और मैंग्रोव की बहाली का पूरा विवरण देना होगा।

मुंबई कोस्टल रोड (नॉर्थ) प्रोजेक्ट के विस्तार के रूप में देखी जा रही वर्सोवा-भायंदर रोड पर करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह पूरी परियोजना 103 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैली हुई है।

कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के प्रभाव क्षेत्र में लगभग 60,000 मैंग्रोव आते हैं। इनमें से 45,000 मैंग्रोव निर्माण कार्य से प्रभावित होंगे, जबकि लगभग 9,000 मैंग्रोव को पूरी तरह से काटा जाएगा।

बीएमसी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह सड़क शहर के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस बुनियादी ढांचे के निर्माण से न केवल यात्रा के समय में कमी आएगी, बल्कि वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लगने वाले घंटों के जाम से भी मुक्ति मिलेगी।

दूसरी ओर, एनजीओ ‘वनशक्ति’ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने बीएमसी की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। सिंह ने आरोप लगाया कि बीएमसी ने हाईकोर्ट को पुराने वनीकरण के आंकड़े दिखाकर भ्रमित किया है। उन्होंने अक्टूबर 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश से दो महीने पहले की ये तस्वीरें बीएमसी के दावों की पोल खोलती हैं।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की मौजूदगी वाली पीठ ने अंततः परियोजना की जनउपयोगिता को प्राथमिकता दी। अदालत ने माना कि पश्चिमी राजमार्ग पर भीड़भाड़ कम होने से जनता को होने वाला लाभ, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के तर्कों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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हालांकि, पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कोर्ट ने सालाना रिपोर्टिंग की शर्त रखी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बीएमसी वनीकरण के अपने वादों को ईमानदारी से निभाए।

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