भोपाल गैस त्रासदी: यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास प्रदूषित मिट्टी-भूजल की सफाई पर योजना दाखिल करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को 5 हफ्ते का समय

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को भोपाल स्थित बंद हो चुके यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास प्रदूषित मिट्टी और भूजल के आकलन तथा उसकी सफाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए पांच सप्ताह का समय दिया है। यह मामला 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

न्यायमूर्ति वीके सिंह और न्यायमूर्ति एके निरंकारी की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें योजना तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। अदालत ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए सरकार को पांच सप्ताह की मोहलत दे दी।

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि 3 मार्च को स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में ऐसे संस्थानों की पहचान और चयन पर चर्चा हुई जो यूनियन कार्बाइड परिसर और उसके आसपास प्रदूषित मिट्टी और भूजल के आकलन तथा उसकी सफाई का कार्य कर सकें।

बैठक के दौरान कई अहम मुद्दों पर विचार किया गया। इनमें संयंत्र परिसर में मौजूद प्रदूषित मिट्टी और भूजल की जांच, यूनियन कार्बाइड प्लांट की जंग लगी संरचनाओं का डिटॉक्सिफिकेशन और डी-कंटैमिनेशन, तथा पूरे क्षेत्र की समयबद्ध तरीके से सफाई सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शामिल थी।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि इन कार्यों के लिए जल्द ही एक संक्षिप्त निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह निविदा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरण संरक्षण (प्रदूषित स्थलों के प्रबंधन) नियम, 2025 के तहत तैयार की गई ‘रेफरेंस ऑर्गनाइजेशन्स’ की सूची में शामिल संस्थानों से आमंत्रित की जाएगी।

हाईकोर्ट के समक्ष कई याचिकाएं लंबित हैं जिनमें मांग की गई है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

गौरतलब है कि 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से अत्यंत जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इस दुर्घटना में कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि हजारों लोग गंभीर रूप से घायल और स्थायी रूप से प्रभावित हुए थे।

READ ALSO  गुरुग्राम स्कूल मर्डर केस: हरियाणा के दो पुलिस अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, सरकारी मंजूरी के बिना कार्यवाही को बताया अवैध

सुनवाई के दौरान मौजूद एनजीओ ‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन’ की सदस्य रचना ढींगरा ने बताया कि राज्य सरकार को शुक्रवार को ही अपनी योजना अदालत में पेश करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और इसके लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया गया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles