“हम मेडिकल साइंस के विशेषज्ञ नहीं”: सुप्रीम कोर्ट ने सभी ब्लड बैंकों में अनिवार्य NAT टेस्टिंग लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के सभी ब्लड बैंकों में न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAT) अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि रक्त परीक्षण से जुड़े तकनीकी और वैज्ञानिक फैसले अदालत नहीं बल्कि संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ ही बेहतर तरीके से ले सकते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन देने की सलाह दी।

सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा विज्ञान से जुड़े विषयों में न्यायालय को विशेषज्ञता का दावा नहीं करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय पर भरोसा करना चाहिए।

उन्होंने टिप्पणी की,
“हम निश्चित रूप से इस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं… फिर हमें क्यों यह दिखावा करना चाहिए कि हमें मेडिकल साइंस की पूरी समझ है।”

पीठ ने कहा कि रक्त बैंकों में कौन-कौन से परीक्षण अनिवार्य किए जाने चाहिए, इसका निर्णय डोमेन एक्सपर्ट्स और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी ही करेंगे।

याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संस्था इस विषय पर एक विस्तृत प्रतिवेदन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों के सचिवों को दे सकती है। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी विशेषज्ञों की सलाह लेकर इस मुद्दे पर उचित निर्णय ले सकते हैं।

READ ALSO  FIR दर्ज किए और SHO की मंजूरी के बिना किसी भी व्यक्ति को मौखिक रूप से थाने में नहीं बुलाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

पीठ ने यह भी कहा कि याचिका में मांगी गई राहत का वित्तीय प्रभाव भी काफी बड़ा हो सकता है और हर राज्य की अपनी आर्थिक सीमाएं होती हैं।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील से यह भी पूछा,
“क्या आपको लगता है कि पीआईएल विदेश से फंड नहीं होतीं? क्या आपको ऐसा लगता है?”

इस मामले की पिछली सुनवाई 25 फरवरी को हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से NAT परीक्षण लागू करने से जुड़ी लागत और सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ए. वेलन से पूछा था कि पूरे देश में NAT टेस्टिंग लागू करने पर कितना खर्च आएगा और क्या यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है ताकि गरीब मरीज भी इसका लाभ ले सकें।

दिल्ली स्थित एनजीओ सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया था। याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि “सुरक्षित रक्त का अधिकार” संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि देशभर के सभी ब्लड बैंकों में NAT टेस्टिंग अनिवार्य की जाए ताकि रक्तदान से प्राप्त रक्त में मौजूद एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया और सिफलिस जैसे संक्रमणों की पहचान समय पर की जा सके।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट में क़ुरान से आयतों को हटाने की माँग करने वाले वसीम रिजवी पर कोर्ट ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया

याचिका में विशेष रूप से थैलेसीमिया मरीजों की स्थिति का उल्लेख किया गया था। यह एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें मरीज को जीवित रहने के लिए हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है।

याचिका में कहा गया कि भारत को अक्सर “थैलेसीमिया की वैश्विक राजधानी” कहा जाता है, इसलिए रक्त सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। इसमें यह भी कहा गया कि कई मरीजों के लिए जीवन बचाने वाली रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया कभी-कभी गंभीर संक्रमण का जोखिम भी बन जाती है।

READ ALSO  असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर किसी अधिवक्ता को समन नहीं भेजा जा सकता: ईडी

याचिका में हाल के वर्षों की कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया गया। इसमें कहा गया कि मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में वर्ष 2025 में रक्त चढ़ाने के बाद कम से कम छह थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे एचआईवी संक्रमित पाए गए।

इसी तरह झारखंड के चाईबासा स्थित सदर अस्पताल में वर्ष 2025 में रक्त चढ़ाने के बाद पांच बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने की बात कही गई। याचिका में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश में 2023 में एक मेडिकल कॉलेज में रक्त चढ़ाने के बाद 14 बच्चे हेपेटाइटिस और एचआईवी से संक्रमित पाए गए थे।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को नोट करते हुए भी स्पष्ट किया कि रक्त परीक्षण से जुड़े मानकों और प्रक्रियाओं का निर्धारण चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ही किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक आदेश के माध्यम से।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles