पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय में महादलित महिला की बेदखली पर लगाई रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब

पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय जिले में एक मुसहर बस्ती में रहने वाली महादलित महिला को बेदखल किए जाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने सरोज देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक उन्हें हटाने की कार्रवाई न की जाए।

यह मामला बेगूसराय के चेरियाबरियारपुर क्षेत्र स्थित जैमंगला गढ़ की मुसहर बस्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सरोज देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें जमीन से हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिया, जबकि इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

याचिका में कहा गया कि चेरियाबरियारपुर के सर्किल ऑफिसर ने सीधे बिहार भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 की धारा 6(2) के तहत नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दे दिया। जबकि कानून के अनुसार पहले धारा 3 के तहत विधिवत कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए थी।

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याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस जमीन को प्रशासन अतिक्रमण बता रहा है, वह वास्तव में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा नहीं है। बस्ती में रहने वाले लोग “पर्चा धारक” हैं और उनके पास भूमि से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत से समय मांगा गया ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या बिहार सार्वजनिक अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई थी या नहीं।

राज्य के अनुरोध को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। साथ ही राज्य के वकील को निर्देश दिया कि वे चेरियाबरियारपुर के सर्किल ऑफिसर को सूचित करें कि अगली सुनवाई तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लागू न की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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