राजस्थान की नदियों में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—अधिकारियों की ढिलाई से सार्वजनिक ढांचा हुआ तबाह

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान की तीन नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अधिकारियों की लापरवाही और देरी के कारण व्यापक सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अदालत जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें बांदी और लूणी नदियों में प्रदूषण का मुद्दा भी सामने आया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान उस उच्च स्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी समिति की अंतरिम रिपोर्ट पर विचार किया, जिसे पिछले वर्ष नवंबर में अदालत ने गठित किया था। इस समिति को नदी तंत्र में प्रदूषण के कारणों की पहचान करने, सुधारात्मक कदमों की निगरानी करने और दीर्घकालिक समाधान सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्थान सरकार की ओर से समिति को पर्याप्त सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के तरीके पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि अधिकारियों की सुस्ती के कारण व्यापक स्तर पर सार्वजनिक ढांचा नष्ट और क्षतिग्रस्त हुआ है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कई फैक्ट्रियां बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रही हैं, जो प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना रही हैं।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि समिति द्वारा उठाए गए लॉजिस्टिक सहयोग से जुड़े मुद्दों को अगली सुनवाई तक दूर कर दिया जाएगा।

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पीठ ने यह भी नोट किया कि समिति की अंतरिम रिपोर्ट में विभिन्न हिस्सों में अब तक उठाए गए कदमों, की गई सिफारिशों और जांच के दौरान सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।

इससे पहले नवंबर में पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में प्रदूषण पिछले लगभग दो दशकों से नियामक तंत्र की विफलता और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

अदालत ने तब कहा था कि यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि इसके कारण पश्चिमी राजस्थान में लगभग 20 लाख लोगों, पशुओं और पूरे नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

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अदालत ने यह भी बताया कि जोजरी नदी जोधपुर से होकर गुजरती है, बांदी नदी पाली जिले में बहती है, जबकि लूणी नदी बालोतरा क्षेत्र से गुजरती है। बांदी और जोजरी नदियां आगे चलकर बालोतरा के पास लूणी नदी में मिल जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया था कि वह नदी तंत्र के पुनर्जीवन और पुनर्स्थापन के लिए वैज्ञानिक आधार पर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे, ताकि प्रदूषण के मूल कारणों की पहचान कर पर्यावरणीय क्षति को रोका और पलटा जा सके।

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