दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसने सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
मामला न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। अदालत ने कहा कि आज इस मामले की सुनवाई संभव नहीं है। इसके बाद ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने अदालत से जल्द तारीख देने का अनुरोध किया। अदालत ने सुनवाई 20 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले 22 दिसंबर को हाईकोर्ट ने ईडी की मुख्य याचिका के साथ-साथ उस आवेदन पर भी नोटिस जारी किया था जिसमें 16 दिसंबर 2025 के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेना “कानूनन स्वीकार्य नहीं” है क्योंकि यह किसी एफआईआर पर आधारित नहीं थी।
हाईकोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को भी नोटिस जारी किया था।
ईडी का आरोप है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस सहित सुमन दुबे, सैम पित्रोदा तथा यंग इंडियन नामक कंपनी के साथ मिलकर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की। एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों पर कब्जा किया गया।
ईडी का दावा है कि ‘यंग इंडियन’ कंपनी में गांधी परिवार की लगभग 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और इसी कंपनी के माध्यम से AJL की संपत्तियां 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले कथित तौर पर अपने नियंत्रण में ली गईं। AJL ही ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार का प्रकाशन करती है।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान 19 फरवरी को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी की ओर से दलील दी थी कि यह मामला मुख्य रूप से एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान से इनकार करने के लिए दिए गए कारण “स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण” हैं और इस मामले में तथ्य नहीं बल्कि कानून के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच और अभियोजन शिकायत तभी टिकाऊ मानी जा सकती है जब अनुसूचित अपराध के संबंध में एफआईआर दर्ज हो। अदालत ने यह भी कहा कि ईडी की जांच एक निजी शिकायत से शुरू हुई थी, न कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से।
यह शिकायत भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी, जिसके आधार पर 2014 में समन जारी हुए थे। हालांकि, इसके बावजूद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित अनुसूचित अपराध के संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की।
ईडी ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट का आदेश ऐसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपियों को केवल इस आधार पर राहत दे देता है कि अनुसूचित अपराध किसी निजी व्यक्ति द्वारा शिकायत के माध्यम से उठाया गया है।
एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि किसी सक्षम अदालत द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान, केवल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की तुलना में अधिक मजबूत आधार रखता है। इसलिए इस आधार पर ईडी की शिकायत को खारिज करना उचित नहीं है।
अब दिल्ली हाईकोर्ट इस विवादित कानूनी प्रश्न पर 20 अप्रैल को विस्तृत सुनवाई करेगा।

