‘क्या टाइम्स ऑफ इंडिया राज्य है?’: सुप्रीम कोर्ट ने अख़बार की पूरी कॉपी देने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार और टाइम्स ऑफ इंडिया को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि अख़बार खरीदने वाले पाठकों को उसके सभी सप्लीमेंट सहित पूरी प्रति उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि किसी निजी समाचारपत्र के खिलाफ रिट याचिका कैसे दाखिल की जा सकती है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष यह याचिका जी. एस. राठौड़ द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि अख़बार खरीदने वाले कई पाठकों को उसके साथ आने वाले सभी सप्लीमेंट नहीं मिलते, इसलिए अदालत केंद्र सरकार और टाइम्स ऑफ इंडिया को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दे कि पाठकों को अख़बार की पूरी प्रति उपलब्ध कराई जाए।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सबसे पहले याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि किसी निजी मीडिया संस्थान के खिलाफ रिट याचिका कैसे चल सकती है।

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पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“टाइम्स ऑफ इंडिया के खिलाफ रिट कैसे चलेगी? क्या टाइम्स ऑफ इंडिया ‘स्टेट’ है, ताकि हम उसके खिलाफ रिट याचिका सुन सकें?”

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित संस्था संविधान के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में नहीं आती, तब उसके खिलाफ इस तरह की रिट याचिका पर विचार करना संभव नहीं है।

याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि यदि उन्हें अख़बार के सभी सप्लीमेंट नहीं मिल रहे हैं तो वह इस संबंध में अपने अख़बार विक्रेता से बात करें।

इसके साथ ही अदालत ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

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