अनुच्छेद 21 के तहत ‘सुरक्षित रक्त का अधिकार’ पर सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में NAT टेस्ट की लागत व उपलब्धता का ब्यौरा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर के सरकारी अस्पतालों में ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इंफेक्शन्स (TTIs) जैसे HIV और हेपेटाइटिस की जांच के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (NAT) की लागत और उपलब्धता से संबंधित विवरण मांगा। न्यायालय उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें “सुरक्षित रक्त के अधिकार” को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा घोषित करने और सभी ब्लड बैंकों में NAT जांच अनिवार्य करने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता संस्था सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन की ओर से पेश अधिवक्ता ए. वेलन से पूछा कि:

  • NAT जांच कराने में कितनी लागत आएगी, और
  • क्या यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है ताकि गरीब मरीज भी इसका लाभ ले सकें।
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इस याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में न्यायालय से यह घोषणा करने का अनुरोध किया गया है कि “सुरक्षित रक्त का अधिकार” अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। साथ ही यह निर्देश देने की मांग की गई है कि देश के सभी ब्लड बैंकों में दाताओं के रक्त की जांच के लिए NAT टेस्ट अनिवार्य किया जाए, ताकि HIV, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस जैसी संक्रमणों का समय रहते पता लगाया जा सके।

याचिका के अनुसार NAT जांच अधिक संवेदनशील पद्धति है, जो संक्रमण की विंडो अवधि में भी वायरस का पता लगा सकती है और इससे संक्रमणमुक्त रक्त की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है।

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याचिका में कहा गया है कि थैलेसीमिया के मरीजों को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है, जिससे वे संक्रमण के जोखिम के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इसमें कहा गया कि कई मरीजों के लिए रक्त चढ़ाना “मौत के साथ जुआ” बन गया है।

थैलेसीमिया को एक आनुवंशिक रक्त विकार बताते हुए कहा गया कि भारत में इसके मरीजों की संख्या अधिक है, इसलिए रक्त सुरक्षा के लिए मानकीकृत जांच प्रणाली आवश्यक है।

याचिका में हाल के कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि:

  • वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में रक्त चढ़ाने के बाद कम से कम छह थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए,
  • झारखंड के चाईबासा स्थित सदर अस्पताल में वर्ष 2025 में पांच बच्चों को रक्त चढ़ाने के बाद HIV संक्रमण हुआ, और
  • वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में रक्त चढ़ाने के बाद 14 बच्चों में हेपेटाइटिस और HIV संक्रमण पाया गया।
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पीठ ने NAT जांच की वित्तीय व्यवहार्यता और सरकारी अस्पतालों में इसकी उपलब्धता से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। इन विवरणों के आधार पर न्यायालय याचिका में उठाए गए व्यापक संवैधानिक और नीतिगत प्रश्नों पर आगे विचार करेगा।

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