मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), ठाणे ने वर्ष 2018 की सड़क दुर्घटना में स्थायी दिव्यांगता झेलने वाली एक महिला दर्जी को ₹20.92 लाख तथा एक घरेलू सहायक को ₹7.75 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने बीमा कंपनी को पहले भुगतान करने और बाद में बीमित शर्तों के “जानबूझकर उल्लंघन” के कारण वाहन मालिक से राशि वसूलने की अनुमति दी।
MACT सदस्य आर.वी. मोहिटे ने 12 फरवरी को एक ही दुर्घटना से जुड़े दो अलग-अलग आदेश पारित किए।
अधिकरण के अनुसार 24 अप्रैल 2018 को रत्ना विजय भगवत (44) और सायली विजय सालुंखे (35) एक लग्ज़री बस से यात्रा कर रही थीं, जब गुजरात के वलसाड ज़िले में एक पुल के पास बस राष्ट्रीय राजमार्ग की पहली लेन में बिना किसी संकेत, लाइट या चेतावनी के खड़े ट्रेलर के पीछे जा टकराई।
इस टक्कर में बस के दो चालकों की मृत्यु हो गई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।
अधिकरण ने इसे समवर्ती लापरवाही (Composite Negligence) का मामला माना। ट्रेलर को राजमार्ग पर लापरवाही से खड़ा किया गया था और दुर्घटना के समय उसके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र भी नहीं था, जो बीमा शर्तों का उल्लंघन था।
सायली सालुंखे को दोनों निचले अंगों के पक्षाघात के कारण 80% स्थायी दिव्यांगता हुई। हालांकि अधिकरण ने उनकी कार्यात्मक दिव्यांगता 50% आंकी और कहा कि आधुनिक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें हाथ और कोहनी की सहायता से चलाई जा सकती हैं।
उन्हें ₹20,92,510 का मुआवज़ा दिया गया, जिसमें ₹1.5 लाख भविष्य के चिकित्सकीय खर्च के लिए शामिल है।
रत्ना भगवत को कमर के क्षेत्र में चोट के कारण 51% स्थायी आंशिक दिव्यांगता हुई। अधिकरण ने उनकी कार्यात्मक दिव्यांगता 30% निर्धारित करते हुए ₹7,75,653 मुआवज़ा दिया।
अधिकरण ने आदेश दिया कि दोनों राशियों पर दावा याचिका की तारीख से 9% वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। साथ ही, सायली सालुंखे के मुआवज़े में से ₹3 लाख और रत्ना भगवत के मुआवज़े में से ₹2 लाख फिक्स्ड डिपॉज़िट में रखने का निर्देश दिया गया।

