असम में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो चुका, विशेष गहन पुनरीक्षण की मांग वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को असम में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि राज्य की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित हो चुकी है और अब याचिका पर कोई राहत देने का प्रश्न नहीं बचता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग की इस दलील को स्वीकार किया कि विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम सूची प्रकाशित हो गई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “अब कुछ शेष नहीं रहा।”

याचिकाकर्ता मृणाल कुमार चौधरी ने निर्वाचन आयोग के 17 नवंबर 2025 के उस ज्ञापन को चुनौती दी थी, जिसमें असम में विशेष गहन पुनरीक्षण के बजाय सामान्य विशेष पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया था।

याचिका में 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की तरह SIR कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी। साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने का भी अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने दलील दी कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए गहन पुनरीक्षण आवश्यक था।

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निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने अदालत को बताया कि विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और 10 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। इस पर पीठ ने कहा कि अब याचिका पर कोई आदेश पारित करने का आधार नहीं बचता।

सुनवाई के दौरान पीठ ने असम में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों की संवेदनशीलता पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वर्तमान वैधानिक ढांचे के तहत निर्वाचन आयोग किसी व्यक्ति को मनमाने ढंग से विदेशी घोषित नहीं कर सकता, क्योंकि इसके लिए निर्धारित कट-ऑफ तिथि और विशेष न्यायाधिकरणों की व्यवस्था है।

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मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “आपको बहुत संवेदनशील और सावधान रहना होगा।”

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण के बाद असम में कुल मतदाताओं की संख्या में 2.43 लाख की कमी आई है।

इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया।

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