चेक बाउंस मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹1.5 करोड़ जमा करने पर राजपाल यादव की सजा 18 मार्च तक स्थगित की, जेल से रिहाई का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को राहत देते हुए चेक बाउंस मामलों में उनकी सजा 18 मार्च तक अंतरिम रूप से स्थगित कर दी और उन्हें जेल से रिहा करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह आदेश उस समय पारित किया जब यह बताया गया कि यादव ने शिकायतकर्ता कंपनी एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में ₹1.5 करोड़ जमा कर दिए हैं।
अदालत ने कहा, “हम आपको सजा के अंतरिम स्थगन की अनुमति दे रहे हैं… यह अगली सुनवाई की तारीख तक प्रभावी रहेगा।”

अदालत ने यादव को अपना पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश छोड़कर न जाने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत या वर्चुअल रूप से उपस्थित रहने को कहा गया।

यादव ने 19 फरवरी को अपने परिवार में होने वाली शादी का हवाला देते हुए सजा स्थगित करने की मांग की थी।

यह कार्यवाही यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर हुई, जिनमें उन्होंने 2019 के सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत के अप्रैल 2018 के उस निर्णय को बरकरार रखा था, जिसमें उन्हें चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई गई थी।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का ऐतिहासिक कदम: इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 सेवानिवृत्त जजों की एड-हॉक' जज के रूप में नियुक्ति की सिफारिश

जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि को अस्थायी रूप से इस शर्त पर स्थगित किया था कि वे शिकायतकर्ता के साथ समझौते की दिशा में “ईमानदार और वास्तविक प्रयास” करेंगे।

2 फरवरी के आदेश में, जब अदालत ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का निर्देश दिया था, तब उनके आचरण की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने भुगतान के संबंध में दिए गए आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन किया।
अदालत ने यह भी कहा था कि सातों मामलों में उन्हें प्रत्येक में ₹1.35 करोड़ का भुगतान करना था और रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा राशि शिकायतकर्ता को जारी करने का निर्देश दिया था।

READ ALSO  बच्चे की कस्टडी तय करते समय उम्र, आय और परिवार का आकार ही एकमात्र मापदंड नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने यह भी दर्ज किया था कि अक्टूबर 2025 में ₹75-75 लाख के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे, जबकि लगभग ₹9 करोड़ की राशि अभी भी देय थी। उस समय अदालत ने सरेंडर की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

यादव के वकील ने पहले कहा था कि चेक फिल्म निर्माण के लिए लिए गए वित्तीय लेन-देन से जुड़े थे और फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने से उन्हें भारी नुकसान हुआ।

READ ALSO  जब कोई वरिष्ठ नागरिक अपने प्रियजनों के पक्ष में उपहार देकर अपनी संपत्ति का हिस्सा देता है, तो वरिष्ठ नागरिक की देखभाल की शर्त इसके साथ जरूरी नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles