दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नितिश कटारा हत्याकांड के दोषी विकास यादव की फरलो पर रिहा होने की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा ने यह आदेश पारित किया। यादव ने 29 अक्टूबर 2025 को जेल प्रशासन द्वारा फरलो याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी।
विकास यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व राजनेता डी. पी. यादव के पुत्र हैं। वे 2002 में हुए बहुचर्चित नितिश कटारा अपहरण और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए थे और फिलहाल 25 साल की बिना रिहाई की छूट वाली सजा काट रहे हैं। यह हत्या, कथित रूप से, विकास की बहन भारती यादव के साथ नितिश कटारा के रिश्ते को लेकर जातिगत विरोध के कारण की गई थी।
विकास के चचेरे भाई विशाल यादव और सहयोगी सुखदेव यादव भी इस अपराध में दोषी ठहराए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2016 को विकास और विशाल यादव की सजा को 25 साल बिना किसी छूट के निर्धारित किया, जबकि सुखदेव यादव को 20 साल की सजा दी गई।
विकास यादव ने अदालत में यह मांग करते हुए याचिका दायर की थी कि उन्हें फरलो पर रिहा किया जाए। फरलो एक अस्थायी रिहाई होती है, जिसे दीर्घकालीन सजायाफ्ता कैदियों को कुछ परिस्थितियों में पुनर्वास के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। यह किसी आपात स्थिति से नहीं जुड़ा होता, बल्कि सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि फरलो देने का कोई वैध आधार नहीं पाया गया।
कटारा हत्याकांड 16-17 फरवरी 2002 की रात का है, जब नितिश कटारा को एक शादी समारोह से अगवा कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। अभियोजन पक्ष ने इस मामले को ‘ऑनर किलिंग’ करार देते हुए कहा था कि नितिश और भारती यादव के प्रेम संबंधों को लेकर आरोपी पक्ष ने यह जघन्य अपराध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह सुनियोजित और क्रूरतापूर्ण हत्या थी, जो सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर की गई थी। यह मामला भारत में ऑनर किलिंग से जुड़ी बहसों और न्यायिक दखल का अहम उदाहरण बन गया।

