इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कथित रूप से अवैध धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार तमिलनाडु निवासी देव सहायम डेनियल राज को जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपों की प्रकृति, सजा की गंभीरता, साक्ष्यों की स्थिति और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राहत दी, हालांकि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर जिले में अवैध धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार तमिलनाडु निवासी देव सहायम डेनियल राज को जमानत प्रदान की है। उन्हें उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति अशुतोष श्रीवास्तव ने की। उन्होंने आदेश में कहा कि आरोपों की प्रकृति, सजा की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए जमानत का मामला बनता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
डेनियल राज और उनके सह-आरोपी पारस को 30 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में बंद थे। पुलिस के अनुसार, डेनियल एक ऐसे गिरोह के प्रमुख थे जो गरीब, कमजोर और आदिवासी समुदायों के लोगों को ‘हीलिंग प्रेयर मीटिंग’ और आर्थिक सहायता के बहाने ईसाई धर्म में परिवर्तित करता था।
पुलिस के अनुसार, डेनियल ने पूछताछ में बताया कि उन्हें “इंडियन मिशनरीज सोसाइटी, तमिलनाडु” द्वारा फील्ड इंचार्ज नियुक्त किया गया था और वे जुलाई 2025 से मिर्जापुर क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके अधीन आठ मिशनरी कार्यरत हैं जिन्हें वेतन, भत्ता और प्रचार-प्रसार के लिए धन दिया जाता है। ये मिशनरी गांवों में जाकर महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता के बहाने चर्च गतिविधियों से जोड़ते थे और फिर धीरे-धीरे उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते थे।
हालांकि, डेनियल के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी एक ऐसे व्यक्ति इन्द्रसेन सिंह की ओर से दर्ज कराई गई है जो न तो पीड़ित है, न ही किसी पीड़ित का रिश्तेदार या परिजन है। ऐसे में प्राथमिकी के आधार पर अभियोजन चलाया जाना विधिसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डेनियल के पास से कुछ भी आपत्तिजनक बरामद नहीं हुआ है।
इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने डेनियल को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि जमानत शर्तें संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
यह मामला उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून की व्याख्या और उसके दायरे को लेकर जारी बहस के बीच सामने आया है।

