दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से सेलिना जेटली के भाई के लिए दुबई की लॉ फर्म को अधिकृत करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई, सेवानिवृत्त मेजर विक्रांत जेटली, को दुबई और अबूधाबी में कानूनी प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए एक दुबई स्थित लॉ फर्म को अधिकृत करे। मेजर विक्रांत पिछले एक साल से अधिक समय से यूएई में कथित रूप से हिरासत में हैं।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह निर्देश उस याचिका पर दिया जिसे सेलिना जेटली ने दाखिल कर अपने भाई के लिए “प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व” की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया है कि उनके भाई को 6 सितंबर, 2024 को “ग़ैरकानूनी रूप से अगवा कर हिरासत में लिया गया” और तब से वह यूएई में बंद हैं।

कोर्ट को बताया गया कि एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म उनके भाई की प्रो-बोनो (निःशुल्क) कानूनी सहायता करने को तैयार है, लेकिन उसे यूएई में कानूनी कार्रवाई करने के लिए भारत सरकार की औपचारिक अनुमति की आवश्यकता है।

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इस पर न्यायाधीश ने कहा,

“आप या तो आदेश जारी करें या शपथपत्र दाखिल करें… निष्पक्षता यही कहती है कि उसे कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, है न?”

आदेश में हाईकोर्ट ने कहा:

“विदेश मंत्रालय उपयुक्त आदेश जारी करे जिससे उक्त लॉ फर्म को श्री विक्रांत कुमार जेटली का दुबई और अबूधाबी में सभी प्रयोजनों के लिए प्रतिनिधित्व करने हेतु अधिकृत किया जा सके। यदि किसी कारणवश इस निर्देश का अनुपालन नहीं किया जा सकता, तो संबंधित कारण 10 फरवरी तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।”

याचिका के अनुसार, मेजर विक्रांत जेटली एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं और 2016 से यूएई में रह रहे थे। वह वहां MATITI ग्रुप नामक कंपनी में कार्यरत थे, जो ट्रेडिंग, कंसल्टेंसी और रिस्क मैनेजमेंट सेवाओं का कार्य करती है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके हिरासत में लिए जाने के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विदेश मंत्रालय उनके कानूनी दर्जे, स्थिति या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त नहीं कर सका है।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि लॉ फर्म सहायता देने को तैयार है, लेकिन मंत्रालय की औपचारिक अनुमति न मिलने के कारण वह कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है।

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 10 फरवरी तय की है और कहा है कि तब तक मंत्रालय स्पष्ट करे कि वह आदेश जारी करेगा या विरोध दर्ज करेगा।

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