दिल्ली कोर्ट ने M3M इंडिया और बंसल परिवार के खिलाफ ₹450 करोड़ भूमि घोटाले में आरोपपत्र पर संज्ञान लिया

दिल्ली की एक अदालत ने रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी M3M इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों—बसंत बंसल, रूप बंसल और पंकज बंसल—के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए उन्हें 4 अप्रैल को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह मामला MGF Developments Ltd के साथ गुरुग्राम में एक बहुचर्चित जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹450 करोड़ बताई गई है।

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत कार्रवाई के लिए prima facie पर्याप्त आधार हैं।

“इस चरण में अदालत को केवल यह देखना होता है कि कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं, न कि यह कि आरोप साबित करने के लिए सबूत पर्याप्त हैं,” अदालत ने कहा।

यह मामला मार्च 2022 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जो MGF डिवेलपमेंट्स द्वारा दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप है कि 2016 में Chauma Village, Gurugram की लगभग 31 एकड़ जमीन के बदले M3M समूह से अन्य जमीन और ₹114 करोड़ के पोस्ट-डेटेड चेक लेने का समझौता हुआ था।

शर्त यह थी कि यदि चेक बाउंस होते हैं, तो ट्रांसफर स्वतः रद्द माना जाएगा। लेकिन शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि चेक बाउंस हो जाने के बावजूद M3M ने न केवल जमीन पर कब्जा कर लिया, बल्कि उसे विभाजित कर लाइसेंस के लिए आवेदन भी कर दिया।

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चार्जशीट की समीक्षा करते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा:

“प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता कंपनी को गुरुग्राम की जमीन के आदान-प्रदान के लिए प्रेरित किया और भुगतान न करके धोखाधड़ी से भवन परियोजना हेतु म्युटेशन करा लिया।”

एफआईआर के मुताबिक, बिना वैध भुगतान और कब्जे के, आरोपियों ने जमीन के टुकड़े कर हरियाणा की न्यू इंटीग्रेटेड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत आवासीय परियोजनाओं के लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जिससे MGF को ₹450 करोड़ का नुकसान हुआ।

इस विवाद के सिलसिले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को एक आदेश में M3M को निर्देश दिया था कि वह विवादित जमीन पर किसी भी तीसरे पक्ष का अधिकार न बनाए जब तक कि MGF की अपील पर निर्णय नहीं हो जाता।

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यह जमीन सेक्टर 113, गुरुग्राम में स्थित है, जहां M3M की कई वाणिज्यिक और आवासीय परियोजनाएं चल रही हैं।

यह मामला न केवल दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW), बल्कि गुरुग्राम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में भी आ गया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और कानूनी जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब यह मामला 4 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए अदालत में पहुंचेगा, जब आरोपी अदालत के समक्ष पेश होंगे।

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