प्राइवेट प्रॉपर्टी में धार्मिक प्रार्थना सभा के लिए अनुमति की जरूरत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि यह गतिविधि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है और इसमें राज्य का हस्तक्षेप अनुचित है।

यह निर्णय Maranatha Full Gospel Ministries और Emmanuel Grace Charitable Trust नामक दो ईसाई संगठनों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आया, जिन्होंने अपनी निजी प्रॉपर्टी पर धार्मिक सभाएं आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने 27 जनवरी को आदेश पारित करते हुए कहा:

“राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि याचिकाकर्ता को अपनी निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना सभा करने से कोई रोक नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया है कि राज्य के सभी नागरिकों को, बिना किसी धार्मिक या अन्य भेदभाव के, कानून का समान संरक्षण दिया जाता है।”

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि सभा सार्वजनिक सड़क या संपत्ति पर फैल जाए, तो उस स्थिति में आयोजकों को पुलिस को सूचित करना होगा और आवश्यक कानूनी अनुमति लेनी होगी।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे अपनी निजी जगह पर धार्मिक सभा करना चाहते हैं, लेकिन अनुमति के लिए दी गई उनकी याचिकाओं पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने कहा:

“याचिकाकर्ताओं को अपनी सुविधानुसार अपनी निजी संपत्ति पर प्रार्थना सभा आयोजित करने का अधिकार है और इसके लिए राज्य सरकार से कोई अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।”

साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा की आवश्यकता हो तो राज्य यह तय करेगा कि किस प्रकार की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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