मुंबई में वायु प्रदूषण पर कार्रवाई की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करेगा बॉम्बे हाईकोर्ट, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज होंगे अध्यक्ष

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की निगरानी के लिए वह एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और नगर निकायों द्वारा अब तक उठाए गए कदम न तो पर्याप्त हैं और न ही उनके कोई ठोस नतीजे दिख रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, “हम किसी की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन चाहते हैं कि लोग शुद्ध हवा में जीवन जी सकें।”

हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर स्वतः संज्ञान लिया था और देखा था कि प्रदूषण का स्तर “अच्छे” से लेकर “गंभीर” तक पहुंच रहा है। इसके बाद 6 नवम्बर 2023 को अदालत ने अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों के लिए निर्देश जारी किए थे।

लेकिन इसके अनुपालन की समीक्षा करते हुए अदालत ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई नगर निगमों तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की कोशिशें असंतोषजनक हैं।

अदालत ने कहा कि MPCB केवल “अपने हलफनामों के भरोसे चल रही है” और यह भी कि अब तक लिए गए कदमों का कोई ठोस असर ज़मीन पर नहीं दिख रहा। पीठ ने कहा, “हमने पूर्व आदेशों का अवलोकन किया है और पाते हैं कि नगर निकायों और MPCB द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर्याप्त और संतोषजनक नहीं है।”

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हाईकोर्ट ने यह भी जोड़ा कि वह नगर निकायों और MPCB द्वारा दायर सभी हलफनामों व विशेषज्ञ समिति की रिपोर्टों की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और समय सीमित है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समिति प्रतिदिन बैठक करेगी और उसे सभी आवश्यक संसाधन दिए जाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि वह इस समिति को कुछ कानूनी शक्तियाँ देने पर विचार कर रही है ताकि कार्यवाही प्रभावी बन सके।

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कार्यवाही के दौरान एक सुझाव यह भी आया कि वायु प्रदूषण से प्रभावित नागरिकों को मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। इस पर जब नवी मुंबई नगर निगम के वकील ने कहा कि इसके लिए पहले से ही वैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं, तो अदालत ने टिप्पणी की, “शायद महाराष्ट्र में ऐसी संस्थाएं होंगी, लेकिन मौजूदा कार्यवाही में हमने किसी तरह की पहल या सुझाव नहीं देखा है।”

कोर्ट समिति के सदस्यों के नाम अपने लिखित आदेश में घोषित करेगा।

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