मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी बयान पर मानहानि मामला: केजरीवाल और आतिशी की याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल तक टाली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पूर्व दिल्ली मंत्री आतिशी की उस याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक टाल दी, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर दिए गए बयानों पर दर्ज मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की है। यह मामला दिसंबर 2018 में बीजेपी पर 30 लाख मतदाताओं के नाम कटवाने के आरोपों से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने कहा कि मामला विस्तृत सुनवाई की मांग करता है, इसलिए इसे टाला जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने, जो आप नेताओं की ओर से पेश हुईं, कोर्ट से अनुरोध किया कि इसे किसी ‘नॉन-मिसलेनियस डे’ (मंगलवार, बुधवार या गुरुवार) को सूचीबद्ध किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 30 सितंबर 2024 को शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी।

यह मामला आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिसंबर 2018 में की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी की साजिश के तहत चुनाव आयोग ने दिल्ली में करीब 30 लाख वोटरों—खासकर बनिया, मुस्लिम और पूर्वांचली समुदाय के लोगों—के नाम मतदाता सूची से हटवा दिए हैं।

बीजेपी दिल्ली इकाई की ओर से राजीव बब्बर ने इन बयानों को पार्टी की छवि को धूमिल करने वाला बताते हुए अदालत में शिकायत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और 500 (मानहानि की सज़ा) के तहत आरोप तय करते हुए आप नेताओं को समन जारी किया था।

केजरीवाल, आतिशी, सुशील गुप्ता और मनोज कुमार ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के समन आदेशों को चुनौती दी थी, लेकिन राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ये बयान “प्रथमदृष्टया मानहानिकारक” हैं और इनका उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना था।

इस याचिका का मूल कानूनी सवाल यह है कि क्या कोई राजनीतिक पार्टी या उसका प्रतिनिधि (जैसे कि बब्बर) भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के तहत “आहत व्यक्ति” माना जा सकता है और क्या उसे आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का अधिकार है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने धारा 122-C यूपीजेडएएलआर अधिनियम की उपधारा (6) के तहत आवंटन रद्द करने के लिए कलेक्टर को स्वप्रेरणा से कार्रवाई शुरू करने की शक्ति स्पष्ट की

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि शिकायत पार्टी की ओर से अधिकृत व्यक्ति द्वारा की गई है, इसलिए यह मान्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

अब यह मामला 21 अप्रैल को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि क्या शिकायतकर्ता वास्तव में “आहत पक्ष” हैं और क्या इस मामले में आपराधिक मानहानि का कोई मामला बनता है। तब तक ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक बनी रहेगी।

READ ALSO  Courts Must Exercise Caution in Convicting Large Groups on Vague Allegations: Supreme Court
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles