सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता विजय की बहुचर्चित तमिल फिल्म जन नायकन को सेंसर सर्टिफिकेट देने के मुद्दे पर दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। फिल्म निर्माता KVN प्रोडक्शंस LLP द्वारा दायर याचिका में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा एकल न्यायाधीश के आदेश पर लगाई गई रोक को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट में मामले की कार्यवाही की गति पर सवाल उठाए और फिल्म निर्माताओं से कहा कि वे हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष उचित राहत के लिए पुनः याचिका दाखिल करें।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, जिन्होंने फिल्म निर्माताओं की ओर से पक्ष रखा, ने दलील दी कि जन नायकन एक “नाशवान वस्तु” है और देरी से निर्माताओं को “गंभीर नुकसान” होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट से आग्रह किया कि वह मामले की सुनवाई 20 जनवरी तक कर ले।
9 जनवरी को मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को आदेश दिया था कि वह जन नायकन को तत्काल सेंसर सर्टिफिकेट जारी करे। लेकिन इसके तुरंत बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिससे फिल्म की रिलीज़ अधर में लटक गई।
KVN प्रोडक्शंस ने इस रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। फिल्म को पोंगल त्योहार पर 9 जनवरी को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन सेंसर प्रमाणन न मिलने के कारण इसमें बाधा आ गई।
जन नायकन न सिर्फ एक फिल्म है, बल्कि यह अभिनेता से नेता बने विजय की राजनीति में पूर्ण रूप से प्रवेश से पहले की अंतिम फिल्म मानी जा रही है। हाल ही में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिऴगा वेत्रि कळगम’ (TVK) की घोषणा की है। फिल्म में राजनीतिक संदेश होने की चर्चा के चलते इसे लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
फिल्म को समय पर प्रमाणन न मिलने को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंकाएं भी जताई गईं, हालांकि अदालती कार्यवाही अब तक प्रक्रिया और नियमों तक सीमित रही है।
अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस मद्रास हाईकोर्ट के पास भेज दिया है, फिल्म की रिलीज़ और सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर अंतिम फैसला 20 जनवरी तक आने की उम्मीद है।

