मसाला बॉन्ड मामले में केरल हाईकोर्ट ने KIIFB के खिलाफ ईडी की कार्यवाही पर तीन महीने की रोक लगाई

केरल हाईकोर्ट ने मसाला बॉन्ड से जुटाए गए धन के इस्तेमाल को लेकर केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) को बड़ी राहत दी है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के आधार पर शुरू की जाने वाली किसी भी आगे की कार्यवाही पर तीन महीने की अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति वी. जी. अरुण ने यह आदेश KIIFB की उस याचिका पर पारित किया, जिसमें ईडी के नोटिस को चुनौती दी गई थी। अदालत ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 के लिए तय की है।

ईडी ने KIIFB पर आरोप लगाया है कि उसने मसाला बॉन्ड से जुटाए गए धन का इस्तेमाल भूमि अधिग्रहण के लिए किया, जिसे एजेंसी ने ‘रियल एस्टेट गतिविधि’ बताया। ईडी का दावा है कि रिज़र्व बैंक के नियमों के तहत ऐसे उद्देश्य के लिए यह धन इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि 16 जनवरी 2019 से लागू आरबीआई की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) रूपरेखा, जो KIIFB के मसाला बॉन्ड पर लागू होती है, उसमें इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियों को रियल एस्टेट की श्रेणी में नहीं रखा गया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी की शिकायत में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि KIIFB ने बॉन्ड से जुटाए गए धन का इस्तेमाल उन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के अलावा किसी और कार्य के लिए किया हो, जिन्हें केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित किया है।

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न्यायमूर्ति अरुण ने कहा कि प्रथम दृष्टया KIIFB की यह दलील सही प्रतीत होती है कि ECB फ्रेमवर्क के तहत उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों को रियल एस्टेट नहीं माना जा सकता और ऐसे में ईडी के पास कार्यवाही शुरू करने का अधिकार भी संदिग्ध है।

अदालत ने यह अंतर भी रेखांकित किया कि आरबीआई की पुरानी ECB नीति में भूमि खरीद को नकारात्मक सूची में शामिल करना और राज्य द्वारा सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण, दोनों एक समान नहीं हैं। अदालत के अनुसार सरकार द्वारा ‘एमिनेंट डोमेन’ की शक्ति का प्रयोग निजी उद्देश्य के लिए भूमि खरीद से बिल्कुल अलग है।

KIIFB ने अदालत को बताया कि जिन भूमियों का अधिग्रहण किया गया, वे बोर्ड के नाम स्थानांतरित नहीं की गईं, बल्कि सीधे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए उपयोग की गईं। अदालत ने कहा कि इस पहलू पर विस्तृत विचार की आवश्यकता है।

अपनी याचिका में KIIFB ने कहा है कि ईडी की शिकायत और नोटिस कानूनन अस्थिर हैं और इनके आधार पर कोई भी न्यायनिर्णयन कार्यवाही उचित नहीं है। बोर्ड ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कार्यवाही आगे बढ़ी तो केरल में कई कल्याणकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए धन जुटाना कठिन हो जाएगा।

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KIIFB के अनुसार, ईडी की कार्रवाई के कारण वित्तीय संस्थान उसे ऋण देने में हिचकिचा रहे हैं। बोर्ड ने बताया कि अब तक ₹90,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से ₹21,881 करोड़ के कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि ₹42,765 करोड़ की परियोजनाएं विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं। KIIFB ने आशंका जताई कि कार्यवाही से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी और ठेकेदारों के वैध भुगतान भी अटक सकते हैं।

नवंबर में ईडी ने KIIFB मसाला बॉन्ड मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, पूर्व वित्त मंत्री थॉमस आइज़ैक और मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव एवं KIIFB के सीईओ के. एम. अब्राहम को ₹467 करोड़ का FEMA उल्लंघन संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में FEMA और आरबीआई के मास्टर निर्देशों के कथित उल्लंघन की राशि ₹466.91 करोड़ बताई गई है।

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KIIFB राज्य सरकार की प्रमुख एजेंसी है, जो बड़े और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए वित्त पोषण करती है। बोर्ड ने वर्ष 2019 में अपने पहले मसाला बॉन्ड इश्यू के जरिए ₹2,150 करोड़ जुटाए थे, जो राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए ₹50,000 करोड़ जुटाने की योजना का हिस्सा था।

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