लंबी हिरासत और समानता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कथित TPC जोनल कमांडर को अंतरिम जमानत दी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति समिति (TPC) के कथित जोनल कमांडर दशरथ सिंह भोक्ता उर्फ दशरथ गंझू को अंतरिम जमानत प्रदान की। भोक्ता पर झारखंड में उगाही और उसके जरिये हथियार खरीद व संगठन की गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के आरोप हैं। उनके खिलाफ मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आर्म्स एक्ट के तहत चल रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने यह ध्यान में रखा कि मामले में अन्य मुख्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट उचित शर्तें तय कर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कर सकता है और उन्हें अंतरिम राहत दी जा सकती है। पीठ ने निर्देश दिया कि उनकी रिहाई पर उपयुक्त शर्तें लगाई जाएं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जमानत का विरोध किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने प्रस्तुत किया कि भोक्ता प्रतिबंधित संगठन का सक्रिय सदस्य था और गवाहों में से केवल छह की गवाही बाकी है। उन्होंने आग्रह किया कि अदालत इस मामले पर शीतकालीन अवकाश के बाद विचार करे।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने लंबी हिरासत और समानता (Parity) के सिद्धांत को आधार मानते हुए अंतरिम जमानत मंजूर की। भोक्ता 17 मई, 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला शुरू में पांकी थाना में दर्ज हुआ था जिसे बाद में NIA ने अपने हाथ में ले लिया।

अभियोग के अनुसार, भोक्ता ने झारखंड के व्यापारियों और ठेकेदारों से उगाही कर TPC की गतिविधियों को वित्तीय सहायता दी, हथियार खरीदे और कथित अवैध धन से अपनी पत्नी के नाम पर संपत्तियाँ भी खरीदीं।

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मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत से अभियोजन पक्ष के आरोपों के गुण-दोष प्रभावित नहीं होंगे।

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