तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) से उन याचिकाओं पर अलग-अलग जवाब मांगा जिनमें द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), पश्चिम बंगाल कांग्रेस इकाई और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय को इस विषय पर लंबित कार्यवाहियों को अगले आदेश तक स्थगित रखने को कहा।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन को सूचीबद्ध करने की अनुमति भी दी, जिसने तमिलनाडु में इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया का समर्थन किया है।

चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर को 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण की घोषणा की थी। यह प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगी।

चुनाव आयोग के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर को जारी की जाएगी और अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

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इनमें से चार राज्य—तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल—में वर्ष 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। आयोग ने कहा कि असम, जहां 2026 में चुनाव होने हैं, के लिए मतदाता सूची संशोधन की तिथियां अलग से घोषित की जाएंगी।

विपक्षी दलों द्वारा दायर याचिकाओं में SIR प्रक्रिया की वैधता और समय पर सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची संशोधन में पारदर्शिता और प्रक्रिया का अभाव है। सुप्रीम कोर्ट अब चुनाव आयोग के जवाब दाखिल करने के बाद मामले की आगे सुनवाई करेगा।

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