दिल्ली-एनसीआर में गैंगस्टर मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, केंद्र और दिल्ली सरकार से चार हफ्ते में ठोस योजना मांगी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संगठित अपराध और पेशेवर गैंगस्टरों के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) की स्थापना का सुझाव दिया और केंद्र तथा दिल्ली सरकार को चार हफ्तों के भीतर इस संबंध में एक ठोस योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उस समय पारित किया जब वह महेश खत्री उर्फ भोली की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 55 आपराधिक मामलों का सामना कर रहा है, जिनमें कई गंभीर अपराध शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि 288 मामलों में अभी तक ट्रायल लंबित है, लेकिन केवल 108 मामलों में आरोप तय हुए हैं, और मात्र 25% मामलों में ही अभियोजन पक्ष की गवाही की प्रक्रिया शुरू हो पाई है — जो कि मुकदमे की पहली औपचारिक चरण होती है। आमतौर पर, प्रत्येक मुकदमे को चार साल तक का समय लग सकता है।

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पीठ ने कहा कि ऐसी देरी से न केवल आरोपी का त्वरित सुनवाई का अधिकार प्रभावित होता है, बल्कि गवाहों की सुरक्षा और न्याय प्रणाली में आम जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

न्यायालय ने कहा, “इस सप्ताह हमने पढ़ा कि एक गवाह की हत्या कर दी गई। ऐसे में कौन गैंगस्टरों के खिलाफ गवाही देगा? यदि आप उन्हें सुरक्षा नहीं देते, तो न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास समाप्त हो जाएगा।”

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपराध करने के बाद आरोपी राजधानी में छिप जाते हैं। पीठ ने कहा, “समाज को ऐसे गैंगस्टरों से मुक्ति दिलानी होगी। इनके प्रति कोई अनावश्यक सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।”

दिल्ली पुलिस की ओर से यह सुझाव दिया गया कि जेल परिसरों के भीतर ही विशेष कोर्ट स्थापित किए जाएं, ताकि ऐसे खतरनाक अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई तेज हो सके और उन्हें बार-बार अदालत लाने की जरूरत न पड़े। साथ ही, इससे गवाहों और आरोपियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों द्वारा ‘रील्स’ बनाने जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगेगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस दिशा में केवल तभी ठोस कदम उठाया जा सकता है, जब केंद्र और दिल्ली सरकार समन्वय से एक ठोस नीति बनाएं और पर्याप्त न्यायिक अधिकारियों, स्टाफ तथा ढांचे की व्यवस्था हो।

कोर्ट ने कहा, “यदि उपयुक्त संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएं और मामलों को उचित रूप से वितरित कर प्रतिदिन सुनवाई हो, तो लंबित मुकदमों का शीघ्र निपटारा संभव है।”

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सुनवाई के अंत में, अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.डी. संजय से कहा कि वे न केवल दिल्ली पुलिस बल्कि केंद्र सरकार की ओर से भी पेश हों और न्यायालय के आदेश को लागू करने की दिशा में कार्रवाई करें।

अब यह मामला चार सप्ताह बाद फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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