दिल्ली कोर्ट ने शादी का वादा करके बलात्कार के मामले में सेना के अधिकारी को बरी किया

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने शादी का झांसा देकर एक महिला से बलात्कार करने के आरोपी सेना के अधिकारी को अपर्याप्त साक्ष्यों का हवाला देते हुए और शिकायतकर्ता की गवाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बरी कर दिया है।

अक्टूबर 2015 में पांडव नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद से न्यायिक जांच के दायरे में रहा यह मामला न्यायाधीश गजेंद्र सिंह नागर के फैसले के साथ समाप्त हो गया। न्यायाधीश ने कहा, “इस अदालत की राय है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।”

ये आरोप ‘रोका’ नामक एक व्यवस्था से उत्पन्न हुए थे, जो सगाई से पहले की रस्म थी, जिसे कथित तौर पर 2012 में उनके माता-पिता ने तय किया था। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि आरोपी, जो उस समय लद्दाख में तैनात था, फरवरी 2014 में दिल्ली आया, शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए और बाद में उसे मनाली ले गया, जहां वे कई दिनों तक साथ रहे।

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हालांकि, बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता के बयान में विसंगतियों को उजागर किया, जिसमें रोका की सही तारीख याद न कर पाना या घटना का फोटोग्राफिक साक्ष्य उपलब्ध न करा पाना शामिल है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मनाली की यात्रा सहमति से हुई थी, जिससे यह आरोप कमज़ोर हो गया कि शारीरिक संबंध झूठे बहाने से स्थापित किए गए थे।

अदालत ने कहा, “यह साक्ष्य के मूल्यांकन का स्थापित सिद्धांत है कि एक आदमी झूठ बोल सकता है, लेकिन परिस्थितियाँ नहीं। वर्तमान मामले में, मामले की पूरी परिस्थितियाँ अभियोक्ता के बयान के विपरीत हैं।” इसके अलावा, यह भी पाया गया कि शिकायतकर्ता की गवाही विश्वसनीय या पर्याप्त गुणवत्ता वाली नहीं थी, जिससे भरोसा पैदा हो सके।

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न्यायाधीश नागर ने विस्तार से बताया कि अभियुक्त ने अभियोक्ता की इच्छा और सहमति के विरुद्ध कोई शारीरिक संबंध नहीं बनाया, जो कृत्यों में स्वेच्छा से भागीदार थी। न्यायाधीश ने कहा, “इन तथ्यों से यह स्पष्ट है कि उसके साथ बलात्कार का कोई अपराध नहीं किया गया है और वह अभियुक्त के साथ रहना चाहती थी, हालाँकि कुछ परिस्थितियों के कारण उनका रिश्ता सफल नहीं हुआ।”

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