कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143A के तहत दिया गया आदेश एक मध्यवर्ती आदेश है, न कि अंतर्वर्ती आदेश। इसलिए, आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षण विचारणीय है। हाल के एक फैसले में, न्यायमूर्ति एम. नागाप्रसन्ना की एकल पीठ ने
