हत्या की कोशिश करने वाले आरोपी को कोर्ट ने दी अजीबोगरीब सजा

राजधानी—- एक व्यक्ति को गुस्से में आपाखोकर कानून हाथों में लेना बेहद महंगा पड़ गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी के विरुद्ध हत्या की कोशिश करने के आरोप में अनोखी सजा सुनाई है जो लोगों के जहन में चर्चा का विषय बनी हुई है। कोर्ट ने आरोपी के ऊपर से हत्या की कोशिश का केस रदद करने के लिए आरोपी शख्स के सामने तीन शर्ते रखी हैं। जिसमे पहले की भविष्य में फिर कभी कोई अपराध न करने की। दूसरी हर्जाने के तौर पर 3 लाख रुपए जमा कराने और तीसरी शर्त बंगला साहिब गुरुद्वारा में एक माह की सामुदायिक सेवा करने की।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मोहम्मद उमेर की याचिका का फैसला करते हुए यह आदेश पारित किया है। आरोपी ने चांदनी महल पुलिस स्टेशन में दर्ज आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या की साजिश का मुकदमा खारिज किए जाने का कोर्ट से अनुरोध किया था। उसके खिलाफ 26 मार्च 2020 में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। केस निरस्त करने की मांग करते हुए याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों के अभिभावकों और शुभचिंतक लोगो के दखल से विवाद का निपटारा हो गया है। 

कोर्ट ने दोनों पक्षों के समझौते के आधार पर केस को रदद करने की मंजूरी देते हुए कहा कि नौजवान को अपने गुस्से पर काबू रखना सीखना ही होगा। और इस बात को मन मे रखना होगा कि वह कानून को अपने हाथ मे नही ले सकता। कोर्ट ने आरोपी को गुरुद्वारा बंगला साहिब में एक महीने तक सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है, जो कि 16 मार्च से शुरु होकर 16 अप्रैल तक चलेगी। 

आरोपी याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए के जुर्माना भी ठोका है। जिसे चार हिस्सों में बांटा जाएगा पहला दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन लायर्स सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड दूसरा हिस्सा दिल्ली पुलिस वेलफेयर फंड तीसरा हिस्सा आर्मी वेलफेयर फंड बैटल केजुअल्टी और चौथा हिस्सा निर्मल छाया फाउंडेशन को जाएगा। 

याची युवक को पैसा जमा कराने के बाद तीन सप्ताह के अंदर इसकी जानकारी हाई कोर्ट को देनी होगी। और संबंधित गुरद्वारे से सामुदायिक सेवा का सर्टिफिकेट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश मिला है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक महीने की सेवा के दौरान युवक अगर गैर हाजिर होता है तो पुलिस के माध्यम से यह सूचना कोर्ट तक पहुँचाई जाय। 

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