मध्य प्रदेश में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस; 2025 में 54 बाघों की मृत्यु, आधे से अधिक अस्वाभाविक कारणों से

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों समेत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को नोटिस जारी किया है और उनसे विस्तृत जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय साराफ की खंडपीठ ने यह निर्देश वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई — जो ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के आरंभ (1973) से अब तक किसी एक साल में दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है।

याचिका के अनुसार, 2025 में जिन 54 बाघों की मौत हुई, उनमें से 57% की मृत्यु अस्वाभाविक कारणों से हुई — जिनमें मानव-पशु संघर्ष, करंट लगना, या अज्ञात परिस्थितियाँ शामिल हैं।

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इससे पूर्व, राज्य में 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघों की मौत दर्ज की गई थी।

दावे के मुताबिक, विश्व भर में कुल 5,421 बाघ हैं, जिनमें से 3,167 भारत में हैं। इनमें से 785 बाघ अकेले मध्य प्रदेश में हैं — यानी देश की कुल बाघ आबादी का 25% हिस्सा।

राज्य को ‘टाइगर स्टेट’ कहे जाने के बावजूद, बाघों की बढ़ती मौतें संरक्षण के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

खंडपीठ ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश के वन विभाग और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से जवाब मांगा है।

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याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी और अधिवक्ता अल्का सिंह पेश हुए। अदालत ने इसी विषय पर लंबित एक अन्य याचिका, जो बाघों के शिकार से जुड़ी है, में भी अधिवक्ता आदित्य सांघी को अमाइकस क्यूरी (न्यायमित्र) नियुक्त किया है। दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की जाएगी।

न्यायालय ने संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। अगली सुनवाई की तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है।

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