दिव्यांग लोगों की गवाही को कमजोर नही माना जा सकता:– सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिव्यांग पीड़िता या दिव्यांग लोगों की गवाही को कमजोर नही माना जाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने एक अपील का निपटारा करते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली को और अधिक दिव्यांग अनुकूल बनाने के लिए दिशनिर्देश भी जारी किए हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि दिव्यांगों के बयान को केवल इसलिए कमजोर नही माना जा सकता कि ऐसा व्यक्ति दुनिया के साथ अलग तरीके से बातचीत या बर्ताव करता है।पीठ ने कहा, कई महत्वपूर्ण बदलावों के बावजूद इस क्षेत्र में और भी काम करने की जरूरत है ताकि उन लोगों तक इसका लाभ पहुँचे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी और राज्य न्यायिक अकादमियों से अनुरोध है कि वे यौन शोषण मामलों में ट्रायल जज और अपीली जज को संवेदनशील बनाएं।ऐसे पीड़ितों से संबंधित प्रावधानों से जजों को परिचित कराएं।सरकारी वकीलों को भी यह प्रशिक्षण दिया जाय।

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कोर्ट ने कहा बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया,एलएलबी प्रोग्राम में ऐसे कोर्स शुरू करने पर विचार कर सकता है। इसके अलावा प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों और द्विभाषीय की नियुक्ति हो।पुलिस को दिव्यांग महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर संवेदनशील बनाएं।

वर्ष 2011 में एक 20 वर्षीय दृष्टिहीन लड़की से दुष्कर्म में ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को दोषी ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) की धारा 3(2) (वी) के अपराध से तो बरी कर दिया लेकिन धारा 376 के तहत दोषसिद्धि को सही ठहराया है।

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