केरल हाईकोर्ट से केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी को झटका; चुनाव याचिका के खिलाफ याचिका खारिज, ‘भ्रष्ट आचरण’ के आरोपों पर चलेगा मुकदमा

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय राज्य मंत्री और अभिनेता सुरेश गोपी द्वारा दायर उस अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से उनकी 2024 की लोकसभा जीत के खिलाफ दायर एक चुनाव याचिका की विचारणीयता (maintainability) को चुनौती दी गई थी। जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री को अपने चुनाव प्रचार के दौरान “भ्रष्ट आचरण” (corrupt practices) के आरोपों का सामना करने के लिए मुकदमे (trial) का सामना करना होगा। यह केरल से भाजपा के पहले लोकसभा सदस्य के लिए एक बड़ी कानूनी बाधा है।

यह कानूनी चुनौती त्रिशूर के निवासी और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के नेता बिनॉय ए.एस. द्वारा दायर एक चुनाव याचिका से उत्पन्न हुई है। बिनॉय ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत परिभाषित “भ्रष्ट आचरण” का आरोप लगाते हुए सुरेश गोपी के निर्वाचन की वैधता को चुनौती दी थी।

सुरेश गोपी ने 2024 के आम चुनाव में त्रिशूर सीट से 74,686 से अधिक मतों की बढ़त हासिल कर केरल में भाजपा के सात दशकों के राजनीतिक सूखे को समाप्त किया था। इस ऐतिहासिक जीत के बाद, उन्हें पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री नियुक्त किया गया।

बिनॉय ए.एस. ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सुरेश गोपी और उनकी प्रचार टीम ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अनुचित गतिविधियों का सहारा लिया:

  • धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग: याचिकाकर्ता का दावा है कि चुनाव प्रचार के दौरान गोपी ने सांप्रदायिक आधार पर वोट मांगने के लिए धार्मिक चित्रों और प्रतीकों का उपयोग किया।
  • भ्रष्ट आचरण: याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता का उल्लंघन करते हुए मतदाताओं को मौद्रिक प्रोत्साहन या अन्य लाभों का वादा किया गया था।
READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की अपील में देरी और सार्वजनिक धन की बर्बादी के लिए आलोचना की

सुरेश गोपी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए एक अंतरिम आवेदन दायर किया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि याचिका में मुकदमे के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।

जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने याचिका की विचारणीयता पर दलीलें सुनने के बाद सुरेश गोपी के आवेदन को खारिज कर दिया। हालांकि हाईकोर्ट ने मूल याचिका से कुछ मामूली आरोपों को हटा दिया है—जैसे कि स्थानीय बाजारों में छाते बांटने की बात—लेकिन कोर्ट ने माना कि भ्रष्ट आचरण और धार्मिक प्रतीकों के दुरुपयोग के मुख्य आरोप मुकदमे के योग्य (triable issues) हैं।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि चुनाव याचिका की विचारणीयता को चुनौती देने वाला मंत्री का आवेदन प्राथमिक आधार पर विफल रहा। अंतरिम आवेदन को खारिज करते हुए कोर्ट ने नोट किया, “प्रतिवादी (सुरेश गोपी) चुनाव याचिका में लगाए गए अन्य भ्रष्ट आचरण के आरोपों के लिए मुकदमे का सामना करेंगे।”

READ ALSO  उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: चेक बाउंस मामलों में अब व्हाट्सएप और ईमेल से होगा समन, समन में ही मिलेगा ऑनलाइन भुगतान का लिंक

इस निर्णय का अर्थ है कि त्रिशूर सांसद को अब एक पूर्ण न्यायिक मुकदमे से गुजरना होगा, जहां सबूतों की जांच की जाएगी कि क्या उनकी जीत अवैध प्रथाओं से प्रभावित थी। यदि हाईकोर्ट अंततः याचिकाकर्ता के दावों में सच्चाई पाता है, तो चुनाव को शून्य (void) घोषित किया जा सकता है, हालांकि यह निष्कर्ष मुकदमे के परिणाम और भविष्य की अपीलों पर निर्भर करेगा।

हाईकोर्ट ने कहा है कि विचारणीयता याचिका को खारिज करने वाला विस्तृत आदेश अभी प्रतीक्षित है।

READ ALSO  बॉम्बे हाई कोर्ट ने वकील की ड्रेस कोड के उल्लंघन पर बार काउंसिल को कार्रवाई करने का निर्देश दिया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles