सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल चुनावों में महिला वकीलों को 30% प्रतिनिधित्व दिया जाए

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के आगामी चुनावों में महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन राज्य बार काउंसिलों में अभी तक चुनाव अधिसूचित नहीं हुए हैं, वहां महिला वकीलों के लिए यह आरक्षण लागू किया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ एक लंबित याचिका में दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर की राज्य बार काउंसिलों में महिला अधिवक्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, वहां 30 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाए — जिसमें 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के ज़रिए और 10 प्रतिशत सीटें नामांकन (co-option) के ज़रिए भरी जाएंगी।

पंजाब और हरियाणा के संबंध में अदालत ने पाया कि अभी केवल अंतिम मतदाता सूची जारी हुई है, और चुनाव अधिसूचना जारी नहीं हुई है, इसलिए इन राज्यों में आरक्षण लागू करना उपयुक्त होगा।

पीठ ने कहा,

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“हमें संतोष है कि 8 दिसंबर 2025 के आदेश के पैरा 4 में ‘पंजाब एवं हरियाणा’ शब्दों को हटाया जाना उचित होगा, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हुई है और केवल मतदाता सूची प्रकाशित हुई है।”

सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को दिए अपने आदेश में कहा था कि जिन चार राज्य बार काउंसिलों में चुनाव अधिसूचित हो चुके हैं, वहां इतनी देर से आरक्षण लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। उस समय पंजाब और हरियाणा को भी छूट दी गई थी। लेकिन अब यह स्पष्ट करते हुए कि चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई थी, अदालत ने अपना पूर्व आदेश आंशिक रूप से संशोधित किया है।

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कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि चुनाव के माध्यम से पर्याप्त संख्या में महिला प्रतिनिधि नहीं चुनी जातीं, तो संबंधित राज्य बार काउंसिल अदालत के समक्ष co-option का प्रस्ताव पेश करें।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, जो महाराष्ट्र बार काउंसिल की ओर से पेश हुईं, ने अदालत से अनुरोध किया कि महाराष्ट्र में करीब 2.7 लाख वकीलों की सदस्यता को देखते हुए महिलाओं को अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान चुनावों में 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के माध्यम से और 10 प्रतिशत co-option के माध्यम से भरते हुए कुल 35 महिला सदस्य चुनी जानी चाहिए।

इस पर अदालत ने सावधानी बरतते हुए कहा कि यह नीतिगत मामला है और न्यायिक सीमा का अतिक्रमण नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा,

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“Article 142 के तहत शक्ति के नाम पर कोई व्यापक आदेश देना बहुत ही खतरनाक परिणाम दे सकता है।”

पीठ ने राज्य बार काउंसिलों में सदस्यों की कुल संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को अगली सुनवाई में न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध किया है।

इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और अन्य वरिष्ठ वकील भी पेश हुए।

याचिका के माध्यम से राज्य बार काउंसिलों में महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व को संस्थागत रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

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