ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई समय सीमा बीती ,निर्णय नही

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई तीन महीने की समयसीमा समाप्त हो गई है, लेकिन इंसाफ अभी बाकी है। अपर जिला न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार सिंह की कोर्ट अभियुक्तों की तरफ से सफाई साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं। चार गवाहों की पेशी हो चुकी है। गवाही खत्म होने के पश्चात बहस और निर्णय हो सकेगा। 

विशेष लोक अभियोजक दामोदर मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के समक्ष पीयूष और उसके भाई मुकेश और ज्योति की मौत से पूर्व उसका इलाज करने वाली एक महिला चिकित्सक की गवाही दर्ज कराई गई है। वहीं अभियुक्त आशीष के दो करीबियों ने बयान दर्ज कराए हैं। जिन्होंने अपने बयान में कहा है कि घटना की रात को आशीष के घटनास्थल पर मौजूद न होकर अपने आसपास होने की बात कही है। 

वकील सुरेश सिंह चौहान ने बताया कि अभियुक्त अवधेश ,सोनू और मनीषा मखीजा की और से सफाई साक्ष्य नही पेश किए जाएंगे। जेल में कैद अवधेश ,सोनू  और रेनू तीनो ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। जिस पर 22 फरवरी को सुनवाई होनी है।

आपको बताते चलें मुख्य आरोपी ज्योति के पति पीयूष की हाई कोर्ट के आदेश पर नवंबर 2020 में 6 वर्ष बाद जेल से रिहाई हो सकी थी। ज्योति के पिता ने जमानत खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर करते हुए इस प्रकरण में तीन माह में निस्तारण के निर्देश दिए थे।

मामला-

 आज से 6 वर्ष पूर्व 27 जुलाई 2014 को बिस्कुट कारोबारी ओमप्रकाश श्यामदासानी की बहू ज्योति की कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी। इस जघन्य हत्याकांड में मृतक ज्योति के पति पीयूष श्यामदासानी पर अपनी कथित प्रेमिका के साथ संबंधों में पत्नी की हत्या करवाने का आरोप लगा है। मामले में पीयूष ,मनीषा मखीजा और आशीष को हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अवधेश,सोनू और रेनू जेल में बंद है। 

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