5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की तीन-सदस्यीय पीठ ने आरोपी अतुल निहाले की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। आरोपी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में दाखिल अपीलों के अंतिम निर्णय तक फांसी की सजा का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़े मूल रिकॉर्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और संबंधित ट्रायल कोर्ट से मंगाए जाएं ताकि अपील की सुनवाई के दौरान उनका परीक्षण किया जा सके।

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अदालत ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया कि आरोपी से संबंधित सभी प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट 12 सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष पेश की जाए।

इसके अलावा, भोपाल केंद्रीय जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वे आरोपी के जेल में रहते हुए किए गए कार्यों, उसके आचरण और व्यवहार से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट भी 12 सप्ताह के भीतर अदालत को सौंपें।

पीठ ने आरोपी के मनोवैज्ञानिक परीक्षण का भी आदेश दिया है। इसके लिए भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्रमुख को एक उपयुक्त चिकित्सकीय टीम गठित करने को कहा गया है, जो आरोपी का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कर रिपोर्ट अदालत को देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी अनुमति दी कि नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के स्क्वेयर सर्कल क्लिनिक से जुड़ी देविका रावत आरोपी से जेल में कई बार व्यक्तिगत मुलाकात कर सकें। इन मुलाकातों के आधार पर वे सजा निर्धारण से संबंधित एक ‘मिटिगेशन इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट’ तैयार करेंगी।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि इन साक्षात्कारों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जेल प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि मुलाकात अलग कमरे में हो और उस दौरान कोई जेल या पुलिस अधिकारी सुनने की दूरी के भीतर मौजूद न हो। साथ ही साक्षात्कार की रिकॉर्डिंग के लिए ऑडियो रिकॉर्डर के उपयोग की भी अनुमति दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 16 सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला 2024 में भोपाल का है, जब पीड़िता की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पांच वर्षीय बेटी लापता हो गई है।

पुलिस द्वारा तलाश अभियान के दौरान ईदगाह हिल्स स्थित एक फ्लैट से बदबू आने की सूचना मिली। जांच करने पर पुलिस को बाथरूम में रखी एक सफेद प्लास्टिक टंकी में बच्ची का शव मिला।

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मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2025 में आरोपी अतुल निहाले को दोषी ठहराते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई थी।

इसके बाद आरोपी ने इस फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह दलील दी गई थी कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित रहने तक दोषी की फांसी की सजा पर रोक रहेगी और अदालत मामले की आगे विस्तृत सुनवाई करेगी।

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