सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता मुकुल रॉय की विधायक पद से अयोग्यता को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने यह आदेश 13 नवंबर 2025 को पारित किया था, जिसमें उन्हें दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए रॉय को फिलहाल विधायक के रूप में बने रहने की अनुमति दे दी है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए बीजेपी के टिकट पर निर्वाचित हुए मुकुल रॉय को इसलिए अयोग्य ठहराया था क्योंकि उन्होंने चुनाव के कुछ सप्ताह बाद ही टीएमसी का दामन थाम लिया था। यह पहली बार था जब किसी अदालत ने संविधान के दसवें अनुसूची (दलबदल कानून) के तहत किसी विधायक को सीधे अयोग्य घोषित किया।
मुकुल रॉय मई 2021 में कृष्णनगर उत्तर सीट से बीजेपी विधायक चुने गए थे, लेकिन जून 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में वापसी की। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया।
यह मामला इस सवाल को उठाता है कि दलबदल कानून के तहत किसी विधायक को अयोग्य ठहराने का अधिकार किसके पास है — विधानसभा अध्यक्ष के पास या अदालत के पास। परंपरागत रूप से, यह अधिकार अध्यक्ष को सौंपा गया है, लेकिन अध्यक्ष द्वारा लंबे समय तक निर्णय न लेने की स्थिति में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
सुप्रीम कोर्ट की यह रोक इस संवैधानिक बहस को और गहरा कर सकती है, खासकर तब जब देश के विभिन्न राज्यों में विधायकों के पार्टी बदलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि अदालतें दलबदल कानून के तहत किस हद तक और किन परिस्थितियों में सीधे अयोग्यता घोषित कर सकती हैं।

