सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा डालने से मना करते हुए स्पष्ट किया कि प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कोई वास्तविक कठिनाई है तो उसे दूर किया जाएगा। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अनुभवहीन अधिकारियों को निर्वाचन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) बनाने पर आपत्ति जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि वह राज्य में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्य में कोई रुकावट न डाले। साथ ही, अदालत ने भरोसा दिलाया कि अगर इस प्रक्रिया में कोई वास्तविक कठिनाई सामने आती है तो उसका समाधान किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजनिया की पीठ ने स्पष्ट कहा:
“हम बाधाएं दूर करेंगे, लेकिन SIR की प्रक्रिया पूरी करने में कोई अड़चन नहीं डालेंगे। इसे बिल्कुल स्पष्ट रूप से समझ लीजिए।”
पीठ ने कहा कि यह पुनरीक्षण प्रक्रिया अपने तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहनी चाहिए और उसमें देरी या अवरोध की कोई गुंजाइश नहीं है।
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा Electoral Registration Officers (EROs) की नियुक्ति में गंभीर खामियां हैं।
उन्होंने कहा कि ये अधिकारी अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) कार्य करते हैं और इसलिए उन्हें निर्णय लेने का उचित अनुभव होना आवश्यक है। आयोग ने लगभग 300 ग्रुप-‘बी’ अधिकारियों की मांग की थी, लेकिन केवल 64 अनुभवी अधिकारी ही नियुक्त किए गए। बाकी की नियुक्ति केवल वेतन समानता (pay parity) के आधार पर कर दी गई।
नायडू ने यह भी बताया कि कुछ नियुक्त अधिकारी इंजीनियर हैं, जो ऐसी अर्ध-न्यायिक भूमिकाओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि उन्हें विधिक निर्णयों का अनुभव नहीं है, जबकि SIR के तहत लिए गए निर्णयों को अपीलीय अधिकारियों के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।
अदालत ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन यह मामला SIR की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है, जो आगामी चुनावों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत द्वारा आगे की सुनवाई में राज्य सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।

