डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा, RTI से जुड़े प्रावधान को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली नई याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे पहले से लंबित समान मुद्दों वाली याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है।

यह याचिका अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी द्वारा दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधान उन मामलों पर लागू न किए जाएं जहां व्यक्तिगत डेटा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) के तहत प्राप्त किया गया हो और उसका विश्लेषण, प्रसंस्करण, प्रसार या पुनर्प्रकाशन किया जा रहा हो।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक हित में किए जाने वाले कार्यों, जैसे भ्रष्टाचार का खुलासा करने, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग को उजागर करने या किसी अपराध की जानकारी सामने लाने वाले मामलों में व्यक्तिगत डेटा के उपयोग पर इस कानून के प्रावधान लागू नहीं होने चाहिए।

याचिका में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 44 को भी चुनौती दी गई है, जिसके जरिए RTI अधिनियम की धारा 8 के एक प्रावधान में बदलाव किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करता है और इससे सूचना पाने के मौलिक अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध लगता है।

इससे एक दिन पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के कुछ अन्य प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था। उस याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम, 2025 के तहत पत्रकारिता, संपादकीय कार्य, खोजी रिपोर्टिंग और सार्वजनिक हित में की जाने वाली रिपोर्टिंग के लिए स्पष्ट और संतुलित छूट का प्रावधान किया जाए। साथ ही पत्रकारों के स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में महिलाओं के लिए ज़मानत की शर्तों पर प्रवर्तन निदेशालय को फटकार लगाई

इससे पहले 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। हालांकि अदालत ने उस समय विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने कहा था कि बिना मामले की विस्तृत सुनवाई किए केवल अंतरिम आदेश के माध्यम से संसद द्वारा लागू की गई किसी कानूनी व्यवस्था को रोका नहीं जा सकता।

READ ALSO  बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्कूलों के पास नशीले पदार्थों और सिगरेट की बिक्री पर स्वतः संज्ञान लिया, छात्रों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई के निर्देश
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles