सोशल मीडिया रील्स के झांसे में आकर सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा प्रेमी जोड़ा; CJI बोले- हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र की अनदेखी क्यों?

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और रील्स किस तरह कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति गलतफहमी पैदा कर सकते हैं, इसका एक अनोखा मामला शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिला। कोर्ट ने अपनी जान को खतरा बताकर सुरक्षा मांगने आए एक प्रेमी जोड़े को राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। यह जोड़ा इस गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंच गया था कि वहां उनकी शादी हो सकती है और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) उन्हें तुरंत सुरक्षा प्रदान करेंगे।

यह मामला तब सामने आया जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष इस जोड़े का उल्लेख किया। वकील ने बताया कि उन्हें यह जोड़ा सुप्रीम कोर्ट की पार्किंग में मिला था।

सोशल मीडिया और कानूनी गलतफहमी

अदालत में पेश वकील ने बताया कि यह प्रेमी जोड़ा सोशल मीडिया रील्स से प्रभावित होकर सुप्रीम कोर्ट आया था। वकील के अनुसार, उन्हें यह विश्वास हो गया था कि वे कोर्ट परिसर के भीतर ही विवाह कर सकते हैं और उन्हें सीधे मुख्य न्यायाधीश से सुरक्षा का आदेश मिल जाएगा।

वकील ने दलील दी कि दोनों की जान को गंभीर खतरा है और उनके परिजनों ने उनके रिश्ते के लिए उन्हें “कठोर सजा” देने की धमकी दी है। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे इस जोड़े को मदद के लिए तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले गईं, तो पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की।

हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर CJI की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने ऐसे मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने और हाईकोर्ट की अनदेखी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सवाल उठाए।

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CJI ने पूछा, “अनुच्छेद 226 के अधिकार क्षेत्र के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?” उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के पास ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई करने और राहत देने की पूरी शक्ति है।

अपने अनुभवों को साझा करते हुए CJI ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहने के दौरान उन्होंने ऐसे कई मामलों की सुनवाई की थी। उन्होंने कहा कि यदि हाईकोर्ट राहत प्रदान करने में विफल रहता है, तभी पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट आने की स्वतंत्रता है।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

पीठ ने इस याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन जोड़े की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वकील को तुरंत दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वे संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (जुडिशियल) से संपर्क करेंगे ताकि इस मामले पर उचित और त्वरित विचार सुनिश्चित किया जा सके।

यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली “वायरल” कानूनी सलाह और भारतीय न्यायिक प्रणाली की वास्तविक प्रक्रिया के बीच के बड़े अंतर को रेखांकित करती है।

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